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पालकों का अनुरोध, चुनाव कोई सा भी हो भाजपा को वोट मत देना, किसी को भी नहीं दे सकते तो घर बैठे रहना

 

न्यायालय ने ट्यूशन फीस लेने का बोला, स्कूल वालों ने मासिक फीस को ही ट्यूशन फीस बनाया, शिवराज सरकार लगाम तक नहीं लगवा पा रही-पालक रोज कर रहे प्रदर्शन पर बहरी हुई सरकार

उज्जैन। लगभग हर मंच से ‘मेरे प्यारे भांजे भांजियों’ तुम्हारा मामा तुम पर कोई मुसीबत नहीं आने देगा, ऐसे राग अलापने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान जब वाकई में बेटे बेटियों पर मुसीबत आई और उनके माता पिता की आर्थिक स्थिति खराब हुई तो ‘गायब’ हो गये। पालकगण उनका रास्ता रोक रहे, पर उन्हें उनकी पीड़ा सुनाई नहीं दे रही। न्यायालय ने ट्यूशन फीस लेने का बोला तो स्कूल वालों ने मासिक फीस को ही ट्यूशन फीस बना दिया, शिवराज सरकार न्यायालय के आदेश का पालन तक नहीं करवा पा रही, अब तक ट्यूशन फीस तक निर्धारित नहीं करवा पाई है शिवराज सरकार। ऐसे में बच्चों के माता-पिता ने अनुरोध किया है कि चुनाव कोई सा भी हो भाजपा को वोट मत देना, किसी और पार्टी को वोट नहीं दे सकते तो घर में बैठे रहना।


कोरोना के संकट की घड़ी में जहां आम आदमी की आर्थिक स्थिति दयनीय है, ऐसे समय में शहर के क्रिस्ट ज्योति, कालिदास मांटेसरी स्कूल, सेंटमेरी, सेंटपॉल, सेंट थॉमस, कॉर्मल जैसे स्कूलों ने अपना अमानवीय चेहरा दिखाया है। जो पालक हमेशा से इन स्कूलों को मोटी फीस देते आए, शिक्षा के ये मंदिर महामारी के दौर में संस्कार भूल गए और बच्चों के माता-पिता को प्रताड़ित करने के लिए फीस भरने की अंतिम तारीख बताकर दबाव बना रहे हैं। हालांकि शहर में अक्षत इंटरनेशनल जैसे स्कूल भी है जिन्होंने मानवता दिखाई और 65 प्रतिशत फीस कम की, लोटी स्कूल ने 50 प्रतिशत फीस माफ की, इंगोरिया के शेल पब्लिक स्कूल और टोंककला के ग्रेविटी स्कूल ने 100 प्रतिशत फीस माफ की। वहीं मक्सी के 15 निजी स्कूलों ने फीस माफ की।

यह सारे प्रयास स्कूलों की ओर से किये गये लेकिन शिवराज सरकार, प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई पहल नहीं की गई, केवल बच्चों के माता-पिता शिवराज मामा से मिलने के लिए धक्के खा रहे हैं। इंदौर, उज्जैन, सांवेर में मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिशें की गई उनके समक्ष पीड़ा सुनाई लेकिन अब तक हल नहीं निकला। ऐसे में समस्त स्कूल के पालकों ने अनुरोध किया है कि चुनाव कोई सा भी हो अब मतदान नहीं करें, जो सरकार समय पर काम ना आए उसके लिए घर से निकलकर वोट देने की जहमत क्यों उठायें।

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