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घटिया कार्य की एमपीयूडीसी के अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद कोई कारवाई नहीं

मेघनगर।निमिष नाहटा

 

भ्रष्टाचार की भेंट चढी नल जल योजना,समयावधि बीतने के बाद भी अधूरी।

नगर को मिली नल जल योजना की सौगात ठेकेदार के रवैये से अभिशाप बनकर रह गई है।मुख्यमंत्री नल जल योजना के निर्माण संबंधित महत्वपूर्ण विभिन्न चरण जैसे नवीन पाइपलाइन हेतु गड्ढो की खुदाई से लेकर उन गड्ढों को भरने,सड़क मरम्मत तथा डेम निर्माण, फिल्टर प्लांट निर्माण तथा नये नल कनेक्शन तक सभी कार्यों में ठेकेदार द्वारा अमानक, गुणवत्ताहीन तथा घटिया कार्य करते हुए जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है।जनप्रतिनिधियों व नागरिकों द्वारा की जा रही शिकायतों का असर ना तो ठेकेदार पर हो रहा है और ना ही जिम्मेदारों पर।जागरूक नागरिकों ने घटिया एवं अमानक कार्य की शिकायत अनेकों बार विभागों में की लेकिन ठेकेदार की मनमानी को रोकना किसी के वश की बात नहीं रही।इन शिकायतों पर कई बार एमपीयूडीसी द्वारा जाँच भी
की गई लेकिन सालभर बीत जाने के बाद भी इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की जगह लीपापोती कर दी गई।ठेकेदार की मनमानी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। शासन द्वारा करोड़ों रुपए की राशि खर्च करने के बाद भी भ्रष्टाचार की भेंट चढी इस योजना का समुचित लाभ जनता को नहीं मिल पाएगा।

ठेकेदार मनमर्जी से ही कर रहा काम

पेयजल जैसी अतिमहत्वपूर्ण इस योजना का कार्य ठेकेदार की मनमर्जी से ही चल रहा है।कोरोना के चलते पूरे देश में जब संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था तब प्रतिबंध के बावजूद शासन के निर्देश को ताक में रखते हुए ठेकेदार द्वारा नगर से बाहर निर्माणाधीन डैम पर मजदूरों से कार्य करवाया जा रहा था और वर्तमान में समयावधि समाप्त हो जाने के बाद दूसरी बार अतिरिक्त समय लेने के बाद भी ठेकेदार द्वारा कार्य नहीं किया जा रहा है।


उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा मेघनगर,भाबरा और पेटलावद नगर की पेयजल योजना हेतु संयुक्त रुप से 67 देशों में एक अंतरराष्ट्रीय निविदा जारी की गई थी जो भारत की ही दो कंपनियों पी.सी.स्नेहल प्राइवेट लिमिटेड तथा रेयॉन टेक प्रा.लिमिटेड को संयुक्त रुप से प्राप्त हुई थी। करोड़ो रुपये की इस महत्वपूर्ण योजना में ठेकेदार द्वारा तीनों नगरों में घटिया कार्यों की शिकायत स्थानीय लोग कर चुके हैं।मेघनगर, पेटलावद व भाभरा तीनों नगर के क्षेत्रीय विधायकों ने भी ठेकेदार के घटिया कार्यों पर आपत्ति की इसके बावजूद कंपनी के एक ठेकेदार भार्गव देसाई द्वारा कहा गया कि हमारे द्वारा समस्त कार्य थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन कंपनी टाटा कंसल्टेंसी व एमपीयूडीसी के सुपरविजन में किये जाते है और अप्रूव्ड होने के बाद ही भुगतान होता है। जबकि टाटा कंसल्टेंसी के अधिकारियों का कहना है कि हमारे द्वारा ठेकेदार के किसी भी कार्यों की जांच नहीं की जाती हमारा कार्य तो सिर्फ सलाह देने का है।


टेंडर जारीकर्ता मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के महाप्रबंधक संजीव राजवाड़े को ठेकेदार द्वारा किए जा रहे गुणवत्ताहीन कार्यों की स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार मौके पर चल रहे घटिया और गुणवत्ताहीन कार्य की वीडियो सहित मौखिक और लिखित शिकायत करते हुए नियम के विरुद्ध रात्रि के अंधेरे चलाए जा रहे घटिया कार्य को तुरंत रुकवाने हेतु निवेदन किया गया लेकिन महाप्रबंधक संजीव राजवाड़े ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि इस मामले को सुबह में दिखवाता हूं जबकि कई बार रातभर ठेकेदार का प्रतिनिधि आनन फानन में कार्य पूरा करके सुबह दूसरे वार्ड में नया कार्य करते देखा जाता। इससे निविदा जारीकर्ता एमपीयूडीसी के अधिकारियों की ठेकेदार से स्पष्टतः घनिष्ठता को समझा जा सकता है।ठेकेदार,थर्ड इंस्पेक्शन पार्टी टाटा कंसलटेंसी तथा एमपीयूडीसी के बीच जमकर चल रहे इस खेल का खामियाजा जनता भुगत रही है।

पाँच से आठ दिनों में होता है पेयजल वितरित

उल्लेखनीय है कि जिले में मेघनगर ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां बारिश में भी एक माह में सिर्फ चार या पाँच बार ही नलों में पानी आता है,गर्मियों में यहाँ स्थिति और भी विकट हो जाती है।

तीन वर्ष में रोड की मरम्मत भी नहीं

ठेकेदार ने विगत तीन वर्षों में पूरे नगर की सडकों को जेसीबी के वाईब्रेटर से खोद डाली।वाईब्रेटर के तेज कंपन से तोडी जाने से आसपास की सडक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।पाईपलाईन डालने के बाद आधे अधूरे भरे गड्ढों में बार बार याद दिलाने पर कुछ जगह खानापूर्ति के नाम पर घटिया मिट्टी से भराव कर इति कर दी गई।कई जगह पाईपलाईन टेस्टिंग को भी एक बर्ष बीत चुका है लेकिन सडक की मरम्मत भी नहीं की गई।


बारिश में जगह जगह पानी से गड्ढे भर जाते है जिनसे पूरी सडक पर कीचड़ से फैल जाता है,मच्छर पनपने से बिमारी का भी भय बना रहता है।सडक पर पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।वाहन चालक आये दिन दुर्घटनाग्रस्त होते है।इसके बाद भी जिम्मेदार मौन है जबकि कांट्रेक्ट डीड में खुदाई कार्य करने के बाद तुरंत सडक की मरम्मत करने के निर्देश है लेकिन तीन वर्ष में अब तक पूरे नगर में कहीं भी मरम्मत नहीं हुई।लेकिन इसमें भी एमपीयूडीसी के अधिकारियों को जनता की बजाय ठेकेदार के हित की चिंता अधिक है।

इस संबंध में एमपीयूडीसी के महाप्रबंधक संजीव राजवाड़े से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि मेघनगर में अब तक अतिरिक्त समय सीमा बढ़ाने के बावजूद 70% कार्य पूर्ण हो पाया है।मेघनगर में वर्तमान में कार्य बंद है इसकी जानकारी मुझे नहीं है।मैं इस बारे में जानकारी निकलवाता हूं।सडक की मरम्मत नहीं हुई है।क्योंकि यह मरम्मत ठेकेदार द्वारा पाइपलाइन टेस्टिंग के बाद की जाएगी तथा ठेकेदार द्वारा यदि कार्य गलत किया गया तो उससे पेनल्टी वसूल की जाएगी पहले भी ठेकेदार से कई बार पेनल्टी वसूल की गई है।

नगर के विभिन्न वार्डो के रहवासी महेन्द्र पंवार, अनिल जैन,हिमांशु सोलंकी,विक्रम ठाकुर,दीपक अरोड़ा आदि ने ठेकेदार द्वारा किये जा रहे घटिया कार्य पर तत्काल रोक लगाकर सभी कार्यों की आर्थिक अपराध ब्यूरो जैसी उच्चस्तरीय संस्था से जाँच करने की मांग करते हुए राशि का भुगतान भी रोकने की मांग की।

कीचड़ भरे गड्ढों में गिट्टी की परत बिछाये बिना ही नई पाईपलाईन डाल दी गई।एमपीयूडीसी के अधिकारियों को तुरंत सूचना देने के बावजूद कोई कारवाई नहीं हुई।

फिल्टर प्लांट पर भी नाबालिगों से ठेकेदार ने करवाया कार्य।

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