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स्वर्ग बनाया विभागीय कार्यालय

पवन कुमार सिंह


सीतापुर। शासन और प्रशासन जिस तरीके से ईमानदारी के साथ काम करने वालों की तलाश करने में लगा हुआ है। हर तरफ भ्रष्टाचार को पूरी तरीके से समाप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं और शासन जिस तरीके से इस प्रयास में सफल हो रहा है इसकी भी काफी सराहना हो रही है ।लेकिन हालांकि भ्रष्टाचार जब जरूरत है तो इतनी जल्दी समाप्त होना टेढी खीर है क्योंकि भ्रष्टाचार नसों में व्याप्त है लेकिन फिर भी आज ही बहुत से अधिकारी ऐसे हैं जिनकी उनसे विभागीय इमानदारी के चलते कसमें खाते हैं।

बताते चलें ऐसे ही एक अधिकारी से जिनकी चर्चाएं काफी सराहना पूर्ण हैं। हमने उनकी चर्चाओं को सार्थक का पूर्ण तरीके से देखने के लिए उनके साथ वार्ता करने की ठान ली कि आखिरकार जो ईमानदार शख्स कहा जा रहा है उसमें कितनी ईमानदारी के लक्षण है। और कितने विभागीय उसकी ईमानदारी की कसमें खाते है आखिर इस दावे में कितनी हकीकत है हम पहुंचे संबंधित वन अधिकारी अभय कुमार मल्ल की कुटिया में हां इसे कुटिया ही कहा जा सकता है ।लेकिन अब नहीं पहले तक कुटिया ही थी जिसका कोई भी फुर्सा हाल नहीं था, बल्कि खस्ताहाल था लेकिन आज वन विभाग के अधिकारियों का कार्यालय जब हमने खंगालना शुरू किया। तो पता चला की यह नहर विभाग की कोठी है लेकिन काफी बरसों से बेकार पड़ी थी जिसको सरकारी पत्राचार के माध्यम से वन विभाग को प्राप्त हुई बताते चलें कि यह पत्राचार किसी और ने नहीं बल्कि क्षेत्रीय वन अधिकारी अभय कुमार मल्ल ने किया अब से शुरू होता है इस कोठी को स्वर्ग बनाने का सिलसिला, इसके बाद कोठी का जीर्णोद्धार किया गया बताते चलें इसमें कोई भी सरकारी फंड नहीं लगाया गया ।

इस बात की काफी चर्चाएं हो रही हैं कि बिल्डिंग सरकारी थी और पत्राचार के माध्यम से वन विभाग को प्राप्त हुई थी।लेकिन इसमें कोई भी सरकार की तरफ से सहयोग नहीं लिया गया बल्कि वन अधिकारी अभय कुमार मल्ल ने सरकारी फंड की बगैर बाट जोहे इसका जीर्णोद्धार का फैसला किया और अपने स्तर से काफी पैसा खर्च किया और इसको जो कि कल कुटिया थी, ताजमहल बन गया। बताते चलें कि जब हम क्षेत्रीय वन अधिकारी अभय कुमार मल्ल से इस बारे में चर्चा करनी शुरू की, तो उन्होंने इस पर साफ मना कर दिया उन्होंने कहा की आखिर मेरा कार्यालय तो मेरा दायित्व बनता है कि मैं इसकी साफ-सफाई करूं सरकार का इस में क्या रोल सरकार के पास बहुत काम है लेकिन हमारे पास क्या आपने कार्यालय को साफ सुथरा बनाने का समय नहीं।

फिर उन से क्षेत्र में हो रही गतिविधियों के लिए चर्चा की गई उस पर उन्होंने बताया वन विभाग की कहीं पर भी कोई लापरवाही नहीं की जा रही है अगर कहीं भी गड़बड़ हो रहा है ।लहरपुर मेरे क्षेत्राधिकार के अंतर्गत तो उसकी सूचना मुझ तक पहुंचेगी या फिर पहुंचती है तो मैं उस पर तत्काल कार्यवाही करता हूं किसी भी तरीके से अवैध रूप से कोई भी कार्य नहीं किया जा रहा है और ना ही मैं अपने स्तर से होने दूंगा बताते चलें कि जिस तरीके की रूपरेखा अभय कुमार मल्ल के द्वारा पेश की गई यह विरले ही देखने को मिलती है ।क्षेत्र में वन अधिकारी की इमानदारी की काफी सराहना हो रही है और वह कहा जा सकता है कि विभाग की बेहतर छवि बनाने में कामयाब रहे हैं।

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