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नागदा । नागरिक अधिकार मंच के अध्यक्ष अभय चोपडा एवं संयोजक शैलेन्द्रसिंह चौहान एडवोकेट ने स्थानिय प्रशासनिक अधिकारियो द्वारा सत्तापक्ष के दबाव के चलते मनमानी करते हुए आम लोगो पर जबरन लादे जा रहे न्यायिक प्रकरण से उनके मोलिक अधिकारो का हनन करने के खिलाफ न्याय की मांग करते हुए तथा नागदा को जिला बनाये जाने की प्रक्रिया प्रारम्भ करने एवं कोरोना गाइडलाईन का उल्लंघन करने पर कार्यवाही की मांग को लेकर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, जिलाधीश एवं एसडीएम के नाम ज्ञापन दिया गया।

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नागदा को जिला बनाने का गजट नोटिफिकेशन किया जाए

ज्ञापन में बताया कि नागदा नगर को जिला बनाये जाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं की गई है। प्रशासन द्वारा राजनीतिक दबाव के चलते नागदा को जिला नहीं बनाया जा रहा है। शीघ्रता शीघ्र प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग की गई।

राजनीतिक दबाव में कार्य कर रही पुलिस

इसी प्रकार पिछले दिनो उच्च न्यायालय ने डब्ल्यूपी 18125/2021 ने निर्णय देते हुए यह पाया कि जिला प्रशासन ने पुलिस के द्वारा दिये गये रिकार्ड एवं प्रकरण में कानूनी प्रावधानो से विपरीत जाकर के बगैर तथ्यो के जिलाबदर की कार्यवाही करते हुए मौलिक अधिकारो का हनन किया है एवं लोकतंत्र की हत्या की है।

निर्णय में न्यायालय द्वारा 5000 दंड तो दिया गया है लेकिन इस कार्यवाही हेतु झूठे दस्तावेज तैयार करके न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन करने वाले संबंधित पुलिस विभाग एवं प्रशसकीय विभाग पर अपराध प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया कि पुलिस प्रशासन एवं अधिकारी झूठी गैरकानूनी और अवैध कार्यवाही सत्तापक्ष के इशारो पर करके जनता में भय और आतंक फैला रहे है। इस पर रोक लगाने के उद्देश्य से शासन उचित आदेश जारी कर जनता के मौलिक अधिकारो की रक्षा करते हुए प्रशासन के आतंक से मुक्त कराने की मांग की गई।

कई मामलों में की गई राजनीतिक द्वेषता से कार्रवाई

ज्ञापन में यह भी बताया कि नागदा में पिछले दिनो झूठे प्रकरण आम जनता पर बनाये गये एवं कई आरोपियो एवं अपराधियो को सत्तापक्ष के दबाव में आकर छोड़ दिया गया। कई आवेदन आरोपियो को संरक्षण करने वाले पुलिस थाने में विचाराधीन है। कई गंभीर अपराधीयो को सत्तापक्ष के दबाव में जिलाबदर की कार्यवाही नहीं की गई और कई छोटे मोटे आरोपियो को जिला बदर कर दिया गया है।

प्रकरण न्यायालय में खत्म हो जाने के बाद भी पुलिस द्वारा जानबूझकर उनके रिकार्ड में संशोधन नहीं किया गया है। गुण्डा लिस्ट के प्रावधानो के विपरीत जाकर अपराधिक प्रकरण दर्ज किये। कई व्यक्तियों पर अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत झूठे प्रकरण बनाये गये तथा विश्व हिन्दू परिषद एवं बजरंग दल के नेताओ व कार्यकर्ताओं पर सत्तापक्ष के इशारे पर झूठे प्रकरण बनाये जिससे कि आम जनता के मौलिक अधिकारो का उल्लंघन हुआ।

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