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 सुसनेर से युनूस खान लाला की रिपोर्ट चिरंतन न्युज के लिए

 

श्राध पक्ष में पितरों की धरती पर आने का समय है मध्य प्रदेश के मालवा अंचल की सुकुमार कन्याओं के लिए यह सय मिल बैठकर संजा पर्व मनाने और अपने पुरखों से आशीर्वाद बटोरने का भी है। सुसनेर सहित मालवा अंचल के विभिन्न क्षेत्रों में संजा का उत्सव मनाया जा रहा है । श्राद्ध पक्ष के पूरे 16 दिनों तक कुंवारी कन्याओं द्वारा संध्या का उत्सव मनाया जाता है और शाम होते ही संजा के गीत गाने का सिलसिला शुरू हो जाता है।  संध्या का लोक पर्व मनाने की परंपरा मालवा में लंबे समय से बनी हुई है । तथा अभी भी नगर के कई हिस्सों के साथ ही गांव में संध्या का पर्व उत्साह तथा उमंग के साथ मनाया जा रहा है।  संजा को दीवारों पर गाय के गोबर से बनाया जाता है और संजा के ऊपर रंगीन फूल पत्तियों को सजाकर शाम के समय पूजन आरती की जाती है।  कुंवारी कन्याओं के अलावा विवाह होने के बाद युवतियों का उद्यापन करने के लिए अपने मायके आती है। भले ही शहरों में यह उत्सव अब कम मनाया जाने लगा है । लेकिन गांव में तो आज भी इसका उत्साह दिखाई देता है। वैसे अब बाज़ारों में भी कागजों पर बनी तैयार संजा मिलती है जिसे दीवारों पर आसानी से चिपका दिया जाता है । पर्व में पूजा जाता है पहले दिन 5 पांचे , दूसरे दिन बिजोरा, तीसरे दिन छिछोरा , चौथे दिन बजोट , पांचवे दिन कुंवारा कुंवारी , छठे दिन छबड़ी , सातवें दिन साथिया ,आठवें दिन पाखुडी का फूल , नौवें दिन डोकरा डोकरी , दसवें दिन बंदर की थैली ,   11 वें दिन केल , 12  वें दिन से पुरा किल कोट बनाना शुरु कर देते हैं। जिसे नीचे की ओर से खुला रखा जाता है । उत्तम वर की कामना के लिए कन्याएं  संजाउत्सव मनाती है  , इससे कन्याएं पारंपरिक मांडला बनाना सीखी है किंतु अब कन्या हैं मांडना की जगह रेडीमेड किला कोट  का भी पूजन करती है ।संजा एक लोक देवी है कहते हैं संजा एक लोक देवी है जो हर साल अपनी सखी कन्याओं के बीच श्राद्ध पक्ष के 15 दिनों तक हंसी ठिठोली करने अपने अंचल में  आ पहुंचती है । इस दौरान किशोरियों द्वारा गाय का ताजा  गोबर  लेकर दीवारों पर चांद, सितारे ,पेड़ ,पहाड़ ,पशु ,पक्षी और गणेश तथा स्वास्तिक की आकृतियां बनाती है ।और उन्हें ताजे फूल पत्तियों से सजाती  है  , शाम ढलते ही इन सुंदर सजीली आकृतियों के सामने कन्याओं की बैठक होती है और शुरू होती है सुर में सुर मिलाता संजा गीतों का कारवां संजा की कहानी।

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