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वरीष्ठ अधिकारीयों काे दे रहे गलत जानकारी, अभी भी कई राशन दुकानों में रखा है खराब चावल।
दैनिक चिरंतन सुसनेर से नितेश शर्मा के साथ जगदीश परमार


(मोड़ी) सुसनेर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरीए गरीबो और जरूरतमंदो में घटीया चावल वितरण करने के मामले में खाद्य विभाग के जिम्मैदार मामले काे दबाने में जूटे हुएं है। साथ ही इस पूरे मामले में वरीष्ठ अधिकारीयों को भी गलत जानकारीयां देकर गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। मार्च में जब से लॉकडाउन हुआ तब से जिम्मैदारों ने नगरीय क्षेत्र की इक्का-दुक्का दुूकानो के अलावा किसी भी अन्य दुकान का निरीक्षण करने की जेहमत नहीं उठाई, शासन ने लॉकडाउन के बाद मार्च, अप्रेल और मई के 3 माह के लिए हर एक राशनकार्ड पर प्रति सदस्य 4 किलो चावल सशुल्क तथा 5 किलो चावल प्रति सदस्य के मान से नि:शुल्क वितरण के आदेश देते हुएं चावल को जारी किया था। अौर इस नि:शुलक चावल वितरण में ही करोडो का गडबडझाला किया गया है।

खुलासे के बाद विभाग के जिम्मैदार अधिकारी सहकारी संस्थाओ में खराब चावल नहीं होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड रहे है। जबकि जिम्मैदारों को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करना चाहिए।

बीपीएल और अंत्योदय राशनकार्डधारीयों की फ्री राशन में हुई बडे पैमाने पर गडबडिया


करोडो के घोटाले के इस खेल में बीपीएल राशनकार्डधारीयों और अंत्योदय राशनकार्डधारीयों को शासन के द्वारा मार्च, अप्रैल, मई 2020 फ्री चावल देने के निर्देश दिये गए थे। शासन के निर्देशो के अनुसार बीपीएल कार्ड धारीयों को नियमित रूप से प्रति सदस्य 4 किलो गेहूं तथा 1 किलो चावल निर्धारित राशि लेकर देने थे, इसके अलावा प्रति सदस्य के मान से 5 किलो चावल फ्री देना थे। वहीं अंत्योदय राशनकार्डो में 31 किलो गेहूं और 4 किलो चावल प्रति राशनकार्ड निर्धारित राशि लेकर तथा 5 किलो चावल प्रति सदस्य के मान से नि:शुल्क वितरित किये जाना थे। तथा अगस्त माह में जितना गेहूं और चावल राशि लेकर देना था। उतना ही गेहूं तथा 5 किलो चावल प्रति सदस्य के मान से नि:शुल्क देना थे। इस काम में जमकर बंदरबाट हुई और करोडो का घोटाला मिली भगत से जिम्मैदारों ने किया है।


इस तरह से अंजाम दिया गया है घोटालें को 


शासन के निर्देश है कि राशन लेने वाला परिवार का सदस्य पीओएस मशीन पर अपना अंगुठा लगाता है, इसके बाद ही उसे नियमानुसार निर्धारित मात्रा का राशन प्राप्त करने के लिए पात्रता पर्ची राशन दुकानों से दी जाती है। इसके अलावा नि:शुल्क राशन के लिए भी एक पात्रता पर्ची अलग से निकलती है। किन्तु ग्रामीण क्षेत्रो में राशन कार्डधारीयों को राशन लेते समय पात्रता पर्ची जो पीओएस मशीन से निकलती है। वो नहीं देते हुएं। हाथ से बनी आफलाइन पर्चीया उपभौक्ताओं को दी गई साथ ही उन्हे फ्री राशन की पर्ची निकाली तो गई, किन्तु उपभौक्ताओं काे नहीं दी गई। तथा उस िन:शुल्क राशन को व्यापारीयों को बेच दिया गया। शासन का नियम है की उपभौक्ता को राशन देते समय ही पीओएस मशीन की पर्ची दी जाना चाहिए। किन्तु कई जगहो पर ऐसा नहीं होता। सर्वर नहीं मिलने का बहाना करके पूरे गांव के उपभौक्ताओं की सारी पर्चीयां एक साथ निकाल ली जाती है। उसके बाद भी जिन्हे राशन देना होता है उन्है देते और कमजोर वर्ग के लोगो को राशन समाप्त हो जाने का बहान करते हुएं राशन नहीं दिया जाता है। कूल मिलाकर के इस तरह से भ्रष्टाचार को अंजाम देकर हजारो क्वींटल चावल और गेहूं को सहकारिता विभाग के जिम्मैदारों ने बाजार में बेच कर करोडो की रकम खडी की है। 

राशन दुकानों पर कही भी खराब चावल उपलब्ध नहीं है। क्यों कि इस माह का तो चावल वितरित ही नहीं किया गया है। और जो पुराना था वो चावल अच्छा है, और यदी कही खराब चावल अच्छा है तो उसे वितरण नहीं करने के निर्देश मेरे द्वारा जारी किए जा रहे है।

                                                                                                                              टीकाराम अहिरवार खाद्य अधिकारी, सुसनेर।

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