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देवास।कर्ज को लेकर और मौसम की बेरुखी से तबाह हुई सोयाबीन की फसल के बाद किसानों की आत्महत्या का सिलसिला एक बार फिर मध्यप्रदेश में चल पड़ा है हाल ही में देवास जिले के अंतिम छोर नेमावर थाना क्षेत्र के पिपलिया नान कर मैं किसान किसान लक्ष्मण सिंह ने महज ₹200000 के कर्ज से तंग आकर खेत पर ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली

प्राप्त विस्तृत रिपोर्ट में देवास जिले के अंतिम छोर नर्मदा के किनारे पर पिपलिया नान कर गांव के किसान लक्ष्मण सिंह ने अपने खेत की बर्बाद हुई फसल के बाद घर की आर्थिक तंगाई बच्चों के शादी विवाह की चिंता के साथ उस पर लगा ₹200000 के कर्ज को लेकर खेत पर जाकर कीटनाशक दवा पीकर अपनी जान दे दी।


पुलिस थाना नेमावर से प्राप्त रिपोर्ट में पिपलिया नान कार गांव के किसान लक्ष्मण सिंह ने कर्ज से तंग आकर अपने खेत पर बर्बाद फसल के बीच में कीटनाशक दवा पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली जब इस बात की भनक गांव में लगी और गांव से समूचे देवास जिले में आग की तरह फैल गई जिसने भी सुना दंग रह गया इस घटना से ना सिर्फ देवास जिले का आमजन विचलित हुआ वरन देवास जिले के प्रशासन में भी हड़कंप मच गया एक किसान के कर्ज के कारण आत्महत्या का मामला उसके या उसके परिवार तक ही सीमित नहीं बरन प्रशासन से लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के तरफ भी इशारा करता है कि उन्होंने अपने क्षेत्र के किसानों की बातों से धांधस बंधाया है।

किसान को आज तक सही मायने में सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली

कागजी तौर से किसान को आज तक सही मायने में सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली अगर मिली भी है तो उन किसानों को मिली है जो राजनेताओं के आसपास मंडराते हैं सही मायने में जो इसके हकदार है उन तक सरकार की कोई मदद नहीं पहुंची है यहां तक की पिछले 3 वर्षों से बर्बाद हो रही फसलों का बीमा तक किसानों को आज तक नहीं मिला है जबकि हर वर्ष फसल खराब होने के बाद प्रदेश के मुखिया मामा जी गांव गांव घूम कर ढिंढोरा पीटते रहे किसान भाइयों आपका बेटा भी किसान हैं और उसको अच्छी तरह से मालूम है मेरे भाइयों के क्या हाल-चाल है मैं अच्छी तरीके से जानता हूं हर समय मैं अपने किसान भाइयों के साथ खड़ा हूं उन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आने दूंगा जबकि वास्तविकता कुछ और ही है इस बार भी मामा जी नेमावर छेत्र में आए फसल देखी पिपरमेंट के आंसू आंख में लाए और बोलने लगे आपको घबराने की जरूरत नहीं है भाइयों आपकी सरकार आपके साथ हैं आप अपने खेतों का तत्काल बीमा करवाइए जिससे कि बीमा कंपनी बर्बाद फसल का बीमा रकम आपको दे सके।

मामा जी ऐसी कौन सी बीमा कंपनी है जो मर जाने के बाद बीमा करती है और मरे हुए के बीमे का पैसा देती है आज जब किसान की पूरी फसल नष्ट हो गई नष्ट फसल के बाद आपकी सरकार आपकी किसानों से बीमा कराने की बात कह रही है हो क्या बीमा कंपनी अपने आप को बर्बाद कर आम किसानों को बर्बाद फसल का बीमा देगी? यह प्रश्न आज हर व्यक्ति के दिमाग में है कि बीमा कंपनी पूर्ण रूप से स्वस्थ के बाद भी व्यक्ति के पूरी जांच रिपोर्ट लेती है उसके बाद उस व्यक्ति का बीमा करती है तो फिर बर्बाद फसल के बाद ऐसी कौन सी बीमा कंपनी है जो बर्बाद फसल का बीमा कर रही है। इससे तो यह अच्छा होता यह आपकी सरकार किसानों को सरकारी तो उसे सीधे आर्थिक मदद के रूप में जो बात आपने कमलनाथ के सरकार में आपने कमलनाथ से अपने किसान भाइयों के लिए ₹40000 हेक्टर के मान से बर्बाद फसल का मुआवजा देने की जोरदार मांग की थी कमलनाथ तो चल चल दिए अब आप आकर बैठ गए हैं तो आपको ₹40000 एक्टर के मान से तत्काल किसानों को उनके खाते में बगैर कुछ ढिंढोरा पीटा तब तक डाल देना चाहिए था किंतु ऐसा कुछ भी आपने नहीं किया आपके पास खजाना खाली पड़ा है किसान को आज तक सही मायने में सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली केवल बातों का खजाना आपका भरा हुआ है जिसके माध्यम से अपने चंद चमचों के साथ प्रदेश भर में मीडिया के माध्यम से घड़ियाली आंसू बहाते हुए हमदर्दी का काम कर रहे हैं।

अगर यह गलत है तो प्रदेश की फसल बर्बाद होने का एक महीना गुजर गया अब तक तो सभी खानापूर्ति हो जाने के बाद किसान तक मदद पहुंच जानी थी पर आप तो सरकारी खजाने से पेट्रोल भरा भरा था हवा मार्ग से हवाई फायर कर रहे हो जमीन स्तर पर आपने अभी तक ठोस कदम नहीं रखा रखा होता तो आज नेमावर थाने के पिपलिया नान कार गांव का अपने परिवार का एकमात्र खै नार लक्ष्मण अपने बर्बाद फसल और कर्ज से परेशान होकर अपनी जीवन लीला समाप्त नहीं करता अब भी समय है आप हवाई फायर करना बंद करो और जमीनी स्तर से आम किसान को उसकी बर्बाद हुई फसल का उचित मुआवजा जो आपने कांग्रेश शासन में कमलनाथ से देने के लिए आंदोलन किया था वही रकम अब आप प्रदेश के मुखिया होने के नाते बगैर कुछ देर किए तत्काल उनके खातों में डालें जिससे कि कोई दूसरे परिवार का मुखिया उसके परिवार से सदा सदा के लिए नही बिछड़े साथ ही प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश दें कि प्रदेश का एक भी किसान सरकार की आर्थिक मदद से वंचित नहीं रहे उसके घर तक सरकार का नुमाइंदा जाकर सही मायने में उसके नुकसानी का आंकलन कर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए जिला प्रशासन तक भेज कर पूर्ण निष्ठा के साथ अपने कर्तव्य का पालन करें तभी प्रदेश में अन्नदाता किसान की घृणित आत्महत्याओं पर से राहत मिल सकती है।


किसान लक्ष्मण की आत्महत्या पर अब सैकड़ों लोग राजनीतिक पार्टियां और सत्तारूढ़ के दलाल जाकर घड़ियाली आंसू बहा कर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए अपने-अपने सुर में इस घटना को राजनैतिक जामा पहन आएंगे इसकी शुरुआत हो चुकी है विरोधी पार्टी के नेताओं ने मृतक के घर जाकर धांधस के नाम पर अपनी शोक श्रद्धांजलि देना शुरू कर दी है इससे अच्छा होता विरोधी पार्टी उसके घर ना जाते हुए प्रदेश के मुखिया के घर जाकर मृत किसान के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हैं और तब तक नहीं आते जब तक की प्रदेश के हर किसान के पास सरकार के खजाने से उचित मुआवजा उनके खातों तक नहीं पहुंच जाता पर ऐसा नहीं होगा कूप मंडूक की तरह यह लोग तहसील और जिला मुख्यालय पर शोर मचाते रहेंगे जिनके पास तत्काल इस तरह की मदद के अधिकार नहीं है उनके पास जाकर वाह वाही लूटने का कोई फायदा नहीं है इससे अच्छा है कि प्रदेश स्तर पर जाकर प्रदेश सरकार के मुखिया पर मृत किसान के लिए सरकार से उचित धनराशि उपलब्ध कराएं।

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