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राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका

उज्जैन 05 सितम्बर। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार 5 सितम्बर को दोपहर में शिक्षक दिवस के अवसर पर उज्जैन से वेबिनार के जरीये प्रदेशभर के महाविद्यालयों के प्राध्यापकों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है और इंसान के जीवन जीने की अच्छी शैली के लिए शिक्षक का योगदान महत्वपूर्ण है। ऐसे समस्त शिक्षकों को इस महान दिवस पर हार्दिक बधाई एवं अभिनंदन करता हूं। शिक्षक किसी राष्ट्र की वह शक्ति है, जिससे नीत नये आयाम स्थापित किये जा सकते हैं। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने संवाद के जरीये कहा कि हम सब जानते हैं कि सदियों से भारत विश्व गुरू रहा है। मध्यप्रदेश के उज्जयिनी के सांदीपनी आश्रम में योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण ने विद्याअध्यन कर इंसानों को आदर्शों और मानवता के उत्कृष्ट संस्कारों का पथ प्रदर्शक किया है।

जीवन जीने की अच्छी शैली के लिए शिक्षक का योगदान महत्वपूर्ण

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शासन की मंशानुसार हम सब उच्च शिक्षा में बेहतर गुणवत्ता लाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने अपने संवाद में कहा कि शिक्षक हमें शिक्षित करने के साथ-साथ संस्कारित कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करतें हैं। व्यक्ति, समाज व राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक की भूमिका सदैव सर्वोच्च रहती है। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि बेहतर शिक्षा से स्वर्णिम भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कृत संकल्पित होकर हाल ही में नई शिक्षा नीति लागू की है। नई शिक्षा नीति लागू होने के कार्य को देश की आम जनता ने सराहना की है। संवाद के जरिये उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सिकंदर महान ने अपने गुरू अरस्तु को याद करते हुए कहा था “ मैं अपनी जिंदगी के लिए पिता का ऋणि हुं लेकिन जीवन जीने के इस अच्छी शैली के लिए शिक्षक का होना अत्यंत आवश्यक है।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने नई शिक्षा नीति के बारे में जानकारी देते हुए अवगत कराया कि नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षैत्रिय भाषा में पढ़ाई का माध्यम रखने की बात कही गई है। इसे कक्षा आठवीं या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में शत्-प्रतिशत जीईआर के साथ माध्यमिक स्तर तक एज्युकेशन फॉर ऑल का लक्ष्य रखा गया है। स्कूल से दूर रह रहे बच्चों को दोबारा मुख्य धारा में लाया जाएगा इसके लिए स्कूल के बुनियादी ढाँचे का विकास और नवीन शिक्षा केंद्रों की स्थापना की जाएगी। सामाजिक और आर्थिक नजरिये से वंचित समूहों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाएगा। इस प्रकार से नई शिक्षा नीति में अनेक मुख्य बातें बताई गई है। इस लिए हम सब को संकल्पित होकर प्रयास करने की जरूरत है। नई शिक्षा नीति की भावना और योजना पर चल कर हम भारत को पूरे उत्साह और मनोयोग से  आगे बढ़ने के लिए संकल्पित हों।

उच्च शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस पर वेबिनार के जरिये प्रदेश के कई जिलों के महाविद्यालयों के प्राध्यापकों से संवाद किया और प्राध्यापकों के द्वारा सुझाव को सुनकर उन्हें आश्वस्त किया कि नियमानुसार उनके सुझावों को राज्य सरकार अमल में लायेगी।  उच्च शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को धन्यवाद देते हुए कहा कि गाईड लाईन के आधार पर हाल ही में नीट और जेईई की परीक्षाएं कराने का निर्णय लिया और तत्परता से छात्रों के भविष्य को देखतें हुए परीक्षाएं आयोजित कराई जा रही है। संवाद के अंत में डॉ. यादव ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग आत्मनिर्भरता को लेकर प्रयास कर रहा है। प्राध्यापक अपने-अपने महाविद्यालयों में शिक्षा के क्षेत्र में और क्या बेहतर किया जा सकता है, इस संबंध में प्राध्यापक अपने सुझाव लिखित में प्रस्तुत कर सकते हैं। संवाद के पूर्व भोपाल से आये व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ट के प्रदेश समन्‍वयक डॉ. ब़म्हदीप अलूने ने उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया और संवाद कार्यक्रम का संचालन कर समन्वय किया ।

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