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जेईई ओर नीट के लेकर अभी भी सियासी घमासान जारी।

जेईई-मेन की परीक्षा की शुरुआत हो चुकी है। किंतु उसके परिणाम आने से पहले ही कोरोनावायरस के वह मामले सामने आएंगे जिनको सरकार की ज़िद और अपने भविष्य की कीमत चुकानी पड़ी होगी। क्या जब हमारे देश के होशियार बच्चे बिमारी से गुजरेंगे तो हम उनको इलाज देंगे। खास तौर से उन गरीब घर के बच्चों को जिनके घर में खाने के लिए दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से नसीब होती है।  सरकार को आज छात्रों की सुन्नी चाहिए वह केवल छात्र नहीं है इस देश के नागरिक भी है।
भारत में  जब से कोरोनावायरस आया यहां के लोगों का  जीवन पूरी तरह से बदल गया है।  कोरोनावायरस ने हमें बता दिया है कि हमारी एक भी लापरवाही या देरी के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। स्वास्थ सुविधाओं को दुरुस्त करना और अधिक से अधिक सुरक्षा रखना ही आज हमारी जरूरत है। ऐसे में जब हम भविष्य को बचाने के लिए बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने के लिए सभी प्रवेश प्रकार परीक्षाओं का आयोजन, जिसे यूजीसी इस वक्त आयोजित करने जा रहा है।

 छात्रों का विरोध बेमतलब हो सकता है किन्तु उनका जीवन नहीं। लाखों करोड़ छात्रों की जान से होने वाला यह खिलवाड़ किस आधार पर। जब सौ की गिनती में हमारे यहां केस आ रहें थें, तब इन परीक्षाओं पर रोक लगाई गई और आज जब हजारों की संख्या में केस आ रहें हैं तब आप बच्चों को परीक्षा देने के लिए बुला रहें हैं। क्या यह बच्चों के आम व्यक्ति होने की सज़ा है। जिसकी सुनवाई ना अदालतों में ओर ना सरकारों में। आज लोकतंत्र बस एक कठपुतली बन गया है चंद लोगों के हाथों का, वह जैसे चाहते हैं उसके साथ खिलवाड़ करते हैं ऐसा लग रहा है। काश हमारे यहां भविष्य के सपने देखने वाले बच्चों की सुनी जाती। कोई उनकी तकलीफ और परेशानियों को समझाता।

हमारे देश में सपने और सफलता अमीरों के बच्चों के लिए है। क्या एक रिक्शा चालक या एक सब्जी बैचने वाले जैसे आम लोगों के बच्चों को पढ़ लिख कर इंजीनियर और डॉक्टर बनने का अधिकार नहीं है। क्यों नहीं हमारी सरकार सामने आकर परेशानी में फंसे छात्रों को सेंटर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी लेती है। जिस तरह सरकार छात्रों के भविष्य की बात कर रही है उसी तरह वह छात्रों के जीवन के बारे में विचार क्यों नहीं करती है। भविष्य जरूरी है और जीवन की कोई कीमत नहीं है। हमें आवश्यकता अच्छे डॉक्टर-इंजीनियर की लेकिन केवल कुछ लोगों के लाभ को ध्यान में रख कर हम अपने देश के बच्चों के जीवन के साथ नहीं खेल सकतें हैं। 
लॉक डाउन में फंसे कभी प्रवासी मजदूरों को अपने घर पहुंचाने वाले सोनू निगम आज छात्रों की मदद के लिए भी आगे आएं हैं।  क्या हमारी सरकार में बैठे नेता बस वोट ले कर सरकार बना कर कुर्सी में बैठने के लिए है और काम करने के लिए हमें सोनू निगम जैसे अभिनेताओं की ओर देखना चाहिए।  आज के समय में सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने कै स्थान पर, आम जनता को गुमराह करती रहती है। 
शिक्षा की नीति ओर व्यवस्था पर हम बात कर रहे हैं आज। पहली बार पुरे देश को हिन्दू मुस्लिम से हट कर कोई जरूरी मुद्दा नज़र आ रहा है जिस पर हम अपनी सरकार को घेर रहें हैं। शिक्षा हम सभी के लिए जरूरी है लेकिन क्या हम इस आपातकाल की स्थिति में जेईई और नीट की परीक्षा जिसे तरह सरकार लेने के लिए परेशान हैं। उसका विरोध नहीं करेंगे तो क्या करेंगे।  
रोज बढ़ते कोरोनावायरस के केस जहां हम सभी की परेशानी बढ़ा रहें हैं। हाई कोर्ट ‌खुद सरकार को अधिक समस्या वाले राज्यों में लॉक डाउन लगाने के लिए कह रही है ताकि संक्रमण को रोका जा सके। उसी समय में यदि लाखों की संख्या ‌जमा कर परीक्षा का आयोजन करने की बात करें, तब सभी का सवाल करना जरूरी है कि सरकार के लिए साल महत्वपूर्ण ‌ना की आम नागरिकों की सुरक्षा। जीवन बनाम भविष्य आज इस स्थिति में लाखों करोड़ों छात्रों को ला खड़ा कर दिया है परीक्षा की तिथि ने। 
हमारी सरकार को फिर से विचार करना चाहिए परीक्षा जरूरी है किंतु उस से भी अधिक महत्वपूर्ण है छात्रों का जीवन। विरोध सही हो या गलत बहस सालों की जा सकती है। किंतु यदि कोई छात्र और उसका परिवार संक्रमण की चपेट में आ गया परीक्षा सेंटर जाने के कारण तब हमरी सरकार और हम क्या करेंगे विचार करने का समय आज ही है। छात्र लाचार है किंतु वह हमारे देश का हिस्सा है उनका भी जीवन महत्वपूर्ण है हमें कोई हक़ नहीं है जब हम अपनी जान बचाने के लिए घरों में बैठे है। तब हम उन्हें भविष्य के लिए पेपर लिखने के लिए बाहर भेज दें। 

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