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अधीक्षण अभियंता गए बैकफुट पर शासन की गहन समीक्षा में स्वयं को फसता देख आननफानन में किया टेंडर निरस्त
सीतापुर से ब्यूरो चीफ अजय सिंह की रिपोर्ट



लखनऊ 21अगस्त जनपद के सिधौली स्थित पावर हाउस वाली सड़क के चौड़ीकरण में दूसरी बार आमंत्रित निविदा में की गई व्यापक हेराफेरी मनमानेपन तथा 14 फर्मों मे 3 पसंद की फर्मो को खोल बाकी को दरकिनार करने आदि बातों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विष्णु प्रताप सिंह चौहान द्वारा मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव लोक निर्माण के समक्ष मामले को उठाया गया  था,प्रकरण की गंभीरता तथा प्रथम दृष्ट्या मामले में अधीक्षण अभियंता की गहरी संलिप्तता के दृष्टिगत पूरा मामला शासन ने संज्ञान में लेकर तलब कर लिया।

इसी बीच प्रेषित प्रार्थना पत्र पर 18 अगस्त को  मुख्यमंत्री द्वारा प्रमुख सचिव लोक निर्माण को जांच कर कार्यवाही करने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए, चूंकि मामला गंभीर अनियमितता तथा व्यापक हेराफेरी का था तथा एक ही फर्म पर बार बार कृपा बरस रही थी लिहाजा 20 तारीख को शासन ने समीक्षा की, शासन अपनी समीक्षा में यह पाया कि आरोप सत्य तथा प्रमाणित है, लिहाजा 20 अगस्त की तारीख में ही अधीक्षण अभियंता ने स्वयं को फसता देख अपने पत्रांक 2729 दिनांक 20/8/20 को अपरिहार्य कारण बताते हुए निविदा निरस्त कर दी।

इस संबंध में विष्णु प्रताप सिंह कहते है, अनियमितता के मुख्य 10 विंदु थे, पहली टेंडर से पहले ही कनिष्का कंट्रक्शन को कार्य मिलने की चर्चा, दूसरा बार बार कनिष्का को ही कार्य मिलना तथा अन्य फर्मो को छांट देना, तीसरा 14 में से 11 फर्मों को निरस्त कर देना,चौथा हेराफेरी के लिए टेंडर को पौने दो माह बाद खोलना जबकि नियम 5 दिन के है,और पांचवां उन 2 फर्मों की बिडो को अनुत्तीर्ण कर देना जिन्हें कुछ माह पूर्व उत्तीर्ण कर कार्य दिया गया था,वे सवाल उठाते है तथा बताते है कि इसके अतिरिक्त 4-5 अन्य बिंदु भी है जिन्हें देखा ही नही गया, वे कहते है कि निविदा निरस्त हो जाने से अनिमितता समाप्त नही हो जाती, शासन को इस बिंदु पर दंड की चेतना तक जाना होगा।

अजय सिंह ब्यूरो चीफ सीतापुर 9452 449300

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