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कोरोना मरीजों के घरों के आस-पास हीसैनेटाइजेशन नहीं किया जा रहा
बीते वर्ष इसी तरह के हालातों में नगर निगम ने अमुमन हर दिन ही सैनेटाइजेशन किया था
शहर में मच्छर पनप रहे है लेकिन निगम प्रशासन का स्वास्थ्य अमला हाथ पर हाथ धरे हुए बैठा दिखाई दे रहा


उज्जैन।  कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है…चारों तरफ चीत्कार मची हुई है…अस्पताल में मरीज
मर रहे है…परिजनों के आंसू निकल रहे है…किसी के यहां खाने की दिक्कत हो गई है तो किसी
के पास पैसे होते हुए भी किराना की सामग्री नहीं आ पा रही है क्योंकि दुकानों पर इतनी भीड़
उमड़ रही है कि नंबर आते आते ही बाजार बंद होने का समय आ जाता है और ऐसी स्थिति में खाने पीने
की सामग्री लिए बगैर ही वापस आना पड़ता है…।

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इधर शव जलाने की मशीनों की सांसे फुल गई है श्मशानों में शव जलाने के लिए लकड़ी कंडों की कमी हो गई है और लोगों को शव जलाने के लिए इंतजार भी करना पड़ रहा है।  पिछले 1 सप्ताह से चक्रतीर्थ पर चारों ओर दिन रात चिताएं जलती नजर आ रही हैं। प्रतिदिन 20 से 25 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचना बताए जा रहे हैं। त्रिवेणी स्थित श्मशान घाट पर भी कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

लगातार बढ़ रही मरने वालों की संख्या को देखते हुए ओखलेश्वर घाट पर भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर काफी तेजी से फैल रही है इस बीच एकाएक मरने वालों की संख्या भी बढ़ चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कोरोना हेल्थ बुलेटिन से पता लग रहा है कि कोरोना के ज्यादा लोगों की मौत नहीं हो रही है। लेकिन प्रतिदिन शिप्रा नदी स्थित चक्रतीर्थ पर 20 से 25 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रहे हैं। कभी-कभी यह संख्या 30 से 35 पहुंच जाती है।

चक्रतीर्थ पर बनाए गए अंतिम संस्कार के ऊपरी हिस्से से लेकर शिप्रा किनारे बने अंतिम संस्कार स्थल तक चिताएं जलती नजर आ रही है। त्रिवेणी स्थित श्मशान घाट पर भी कोरोना के संक्रमित होकर जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। ऐसे समय में अचानक मरने वालों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। इधर नगर निगम प्रशासन का स्वास्थ्य अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। वैसे हर दिन ही सैनेटाइजेशनका दावा किया जा रहा है लेकिन असल स्थिति यह है कि कोरोना मरीजों के घरों के आस-पास हीसैनेटाइजेशन नहीं किया जा सका।  जबकि बीते वर्ष इसी तरह के हालातों में नगर निगम ने अमुमन हर दिन ही सैनेटाइजेशन किया था।

शहर में मच्छर पनप रहे है लेकिन निगम प्रशासन का स्वास्थ्य अमला हाथ पर हाथ धरे हुए बैठा दिखाई देता है। मच्छर उन्मूलन के लिए कोई कारगार उपाय नहीं किए जा रहे है जबकि निगम प्रशासन के पास फाॅगिंग मशीनें पड़ी हुई होकर धुल खा रही है। मलेरिया विभाग भी रोकथाम करने के लिए मैदानमें नहीं उतरा है। इधर शहर में आवारा मवेशियों व सुअरों की भी समस्या यथावत है। यत्र-तत्र काॅलोनियों व मोहल्लों आदि में घूमते सुअर गंदगी फैलाते है और इससे भी बीमारियां लोगों को होती ही है।

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