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निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष संजय सिंह को झटका लगा है। वह तैयारी में लगे थे, मगर अब दौड़ से बाहर हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट 2005 में महिला पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित रही। उस वक्त जिले में सपा मजबूत थी। पूर्व विधायक महिपाल स‍िंंह यादव की पत्नी सरोज यादव तब जिला पंचायत की अध्यक्ष बनी थीं। वर्ष 2006 में बसपा से केसर स‍िंंह की पत्नी ऊषा गंगवार को अध्यक्ष बनाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। ऊषा गंगवार 2010 तक अध्यक्ष पद पर रही। 2010 के जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट सामान्य श्रेणी में चली गई। तब नीरू पटेल ने चुनाव जीता था। उनके पीछे पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह थे। बिथरी चैनपुर क्षेत्र में अपनी सियासी जड़ें जमाने के बाद उन्होंने अपने परिवार की नीरू पटेल को जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया।

2015 में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई। नीरू पटेल को चुनौती सपा के संजय स‍िंंह से मिली। सपा के पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार उनके मददगार बने। चुनाव में संजय सिंह को जीत मिली। हालांकि बाद में तत्कालीन जिलाध्यक्ष रहे वीरपाल स‍िंंहयादव को आगे रखा गया था। उस वक्त 60 सदस्यीय सदन में सपा के संजय स‍िंंह ने 50 वोट हासिल कर अध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर ली।

बसपा के राजेश सागर को सिर्फ आठ वोट ही मिले। पिछले चुनाव में मतदान के लिए सपा खेमे से (भाजपाइयों व बसपा के बागियों समेत) 50 सदस्यों को बस में बैठाकर लाया गया। एक घंटे में इन सभी 50 सदस्यों ने मतदान कर दिया। संजय सिंह उसमें भी भारी पड़े। हालांकि जल्द ही उन्होंने ठिकाना बदल लिया और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

संजय के खिलाफ 2016 में अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया, लेकिन सदस्यों के समर्थन के दम अग्निपरीक्षा को पास कर गए थे। इस बार भी चुनाव की तैयारी में लगे हुए थे। लेकिन सीट अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने से वह इस कुर्सी की जंग में शामिल नहीं हो पा रहे। कहते हैं कि मैदान में रहूंगा, भला चेहरा कोई अन्य हो। इशारों में जता दिया कि दोस्त की मां को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाने की तैयारी पहले ही हो रही थी। अब उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाने की कवायद करेंगे।

बोले- जिलाध्यक्ष

हाईकमान से निर्देश मिलने के बाद आगे के फैसले लिए जाएंगे। आरक्षण घोषित होने के बाद स्थिति साफ हो चुकी है। दावेदारों को परखने के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।- पवन शर्मा, जिलाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी

हमारे जिला पंचायत सदस्य ज्यादा से ज्यादा जीतें, यही प्राथमिकता होगी। इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए नामों पर विचार किया जाएगा। पार्टी समर्पित और जिताऊ उम्मीदवार ही मैदान में उतारेंगे।

अगम मौर्य, जिलाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी

हमारे 17 सदस्य जिला पंचायत में थे। इस बार ज्यादा मजबूती से मैदान में उतरेंगे। कोशिश रहेगी कि 25 से ज्यादा सदस्य जीतकर पहुंचें।

जयपाल, जिलाध्यक्ष, बसपा

सबसे पहले सभी वार्डों पर हमारे उम्मीदवार लड़ेंगे, ताकि सदस्य अधिक होंगे तब हम जिला पंचायत अध्यक्ष कांग्रेस का लेकर आएंगे। ये चुनाव हमारी प्राथमिकता में है। पूरी दमदारी से लड़ा जाएगा।

मिर्जा अशफाक सकलैनी, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस

पब्लिश दिनांक- 13/02/2021

एलबी कुर्मी
ब्यूरो हेड बरेली

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