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11 सूत्री मांग को लेकर भू-रैयतों ने मगध कोल परियोजना का काम कराया ठप

चतरा/टंडवा (झारखंड)। कोयलांचल के मगध परियोजना से जुड़े आठ गांव के भू-रैयत अपनी 11 सूत्री मांग को लेकर पिछले चार दिनों से आंदोलित है। इस संबंध में सीसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच गुरुवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही थी। जिससे नाराज भू-रैयतों ने शुक्रवार से अनिश्चित काल के लिए मगध कोल परियोजना का काम-काज ठप करा दिया।

जिससे सीसीएल प्रबंधन के पसीने छूट रहे हैं। वार्ता को लेकर अधिकारियों की संयुक्त टीम का एक दल मगध के आंदोलित भू-रैयतों से शुक्रवार को पुनः एक वार्ता किया जो वह भी बेनतीजा ही रहा। भू-रैयतों ने स्पष्ट कहा कि जब सीसीएल भू-रैयतों के प्रति स्पष्ट रुख नही अपनाती है तब तक किसी भी आश्वासन के झांसे में ग्रामीण नही आने वाले है और परियोजना के लिए एक इंच भी जमीन सीसीएल को नही देंगे।

आंदोलित भू-रैयतों ने अपनी मांगों को फिर से अधिकारियों के समक्ष रखा वार्ता में भू-रैयतों की ओर से एनके पाठक, टंडवा प्रखंड प्रमुख सीता राम साव, बाहादुर उरांव समेत हजारों की तादाद में ग्रामीण उपस्थित हुए। वही सीसीएल की ओर से माइनिंग चीफ मैनेजर ए. मुखर्जी, जेनरल मैनेजर विजय शुक्ला, परियोजना पदाधिकारी अशोक कुमार, मगध महाप्रबधक केके सिन्हा, नोडल पदाधिकारी शंकर झा वार्ता में शामिल हुए। सीसीएल अधिकारियों ने आमसभा में उपस्थित ग्रामीणों के बीच सभी मांगो पर विस्तार से चर्चा किया।

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वार्ता में अधिकारियों ने मांग पूरा करने का आश्वासन दिया। जिसपर आंदोलित भू-रैयतों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व के अधिकारियों ने आश्वासन देकर ठगने का काम किया हैं। लैंड वैल्यू जीएम विजय शुक्ला ने मांगो को जायज ठहराते हुए पांच महीनों का समय ग्रामीणों से मांगी। जिससे समस्या का सामाधान निकाला जा सके। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि समय मांग कर सीसीएल ग्रामीणों को धोखे में रखना चाहती है। पूर्व के आंदोलन में सीसीएल प्रबंधन कुछ ग्रामीणों को रोजगार का लॉलीपॉप देते हुए आपस में बांटकर आंदोलन को असफल कर दिया था। जिससे मगध-आम्रपाली के हजारों भू-रैयतों को न्याय नही मिल पाया।

कोल परियोजना खुलने के बाद स्थानीय बेरोजगार युवक अपनी पढ़ाई कर परिजोजना में रोजी-रोजगार के लिए उम्मीद लगाया था। लेकिन सीसीएल की गलत और दोहरी नीतियों के कारण इनके मंसूबे पर पानी फिर गया है। प्रबंधन ने बाहरी लोगो को रोजगार व कोयला ढुलाई कार्य में लगाया हैं। अपनी मांगों को लेकर भू-रैयत गोलबंद होकर विस्थापित रैयत एकता संघ के बैनर तले 11 सूत्री मांगों को लेकर आंदोलित है। आंदोलन के आलोक में शुक्रवार को संपूर्ण मगध कोल परियोजना का कार्य ठप करा दिया गया।

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