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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बलवंत सिंह राजोआना की ओर से दायर दया याचिका की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. एक सुनवाई के दौरान आज केंद्र ने बताया कि भारत के राष्ट्रपति ने साल 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए दोषी पाये गये राजोआना की याचिकाओं की जांच शुरू कर दी है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बलवंत सिंह राजोआना की ओर से दया याचिका पर फैसला करने के लिए केंद्र को 6 और हफ्ते दिए है.

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बता दें लुधियाना ज़िले के राजोआना कलां गांव से ताल्लुक रखने वाला बलवंत 1987 में पंजाब पुलिस में कांस्टेबल भर्ती हुआ था. काफी समय से पटियाला जेल में बंद बलवंत ही वो शख्स था, जिसने बेअंत सिंह की हत्या के लिए दिलावर सिंह के शरीर पर बम बांधकर उसे सुसाइड बॉम्बर बनाया था. यही नहीं, दिलावर के फेल होने की सूरत में बलवंत ही उसका विकल्प होने वाला था. बब्बर खालसा इंटरनेशनल संगठन ने बलवंत की सज़ा को लेकर उसके साथ हमदर्दी भी ज़ाहिर की थी.

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बेअंत सिंह की हत्या को जायज़ ठहराने वाले बलवंत ने कोर्ट 1996 में कहा था- जज साहिब, बेअंत सिंह खुद को अमन का मसीहा समझने लगा था ओर हज़ारों मासूमों की जान लेकर खुद को गुरु गोबिंद सिंह और राम जी की तरह मानने लगा था इसलिए मैंने उसे खत्म करने का फैसला किया था.

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