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भारत ने बीते साल जून में अपने स्पेस सेक्टर को निजी प्रयोग के लिए भी खोले जाने की घोषणा की थी. इसके 8 महीने बाद इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर पर 2 स्टार्टअप्स की सैटेलाइट टेस्ट की गईं. ऐसा 50 सालों में पहली बार हुआ है. स्पेस मामलों में निजी दखल की देखरेख करने के लिए एक स्वतंत्र संस्था इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथोराइजेशन सेंटर की स्थापना भी की गई थी.

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स्पेसकिड्ज इंडिया और पिक्सल की सैटेलाइट टेस्ट हुईं. घोषणा के 8 महीनों बाद अब भारत PSLV मिशन पर कमर्शियल सैटेलाइट भेजने के लिए तैयार है. यह प्रक्रिया अगले महीने की जानी है. खास बात है कि यह पहला मिशन होगा जब भारतीय उद्योग की तरफ से ISRO कमर्शियल तौर पर सैटेलाइट लॉन्च करेगा.

भारत के स्पेस सेक्टर में निजी प्रयासों की देखरेख के लिए इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथोराइजेशन सेंटर स्थापित किया गया था. यह संस्था ISRO की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं का भी लाभ उठाता है. वहीं, इस संस्था की तरफ से लिए गए फैसले का असर ISRO पर भी पड़ता है. ISRO की व्यवसायिक इकाई न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड की तरफ से किए गए एग्रीमेंट के तहत PSLV C-51 मिशन ब्राजील की सैटेलाइल एमाजोनिया-1 को लेकर जाएगा.

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इस लॉन्च व्हीकल में ISRO की एक नैनोसैटेलाइट, जांच से गुजर रहीं 2 सैटेलाइट और युनिटीसेट्स समेत 20 यात्री सैटेलाइट भी शामिल होंगी. साथ ही एक अन्य स्टार्टअप स्काय रूट भी एक व्हीकल लॉन्च की तैयारी कर रहा है. माना जा रहा है कि इसे साल के अंत तक लॉन्च किया जाएगा. खास बात है कि ISRO इन सभी की स्पेसरिपोर्ट्स उद्योगों के साथ साझा करेगा.

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