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जिसकी सुहानी सुबह और शाम है ।
जिसकी दुनिया मे अपनी आन, बान और शान है।
हर दर्द को सहकर जो न डिगा ,
ऐसी मेरा भारत महान है।।”

लेखिका -दीप्ति डांगे, मुम्बई

ऐसा कहा जाता है कि जब सभ्यताएं अपने विकास के चरम पर पहुंचती है और एक समय के बाद नष्ट हो जाती है ।आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत काल का युद्ध 3137 ईसा पूर्व में हुआ था।  नए तथ्यों के अनुसार यह सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल पुरानी थी। शोधकर्ता ने इसके अलावा हड़प्पा सभ्यता से 10,000 वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकाले हैं। इसका मतलब यह कि यह सभ्यता तब विद्यमान थी जबकि भगवान श्रीराम (5114 ईसा पूर्व) का काल था लगभग इसी काल में सिंधुघाटी की सभ्यता अपने विकास के चरम पर थी। और महाभारत युद्ध के कारण भारत की उन्नत सभ्यता विलुप्त हो गई क्योंकि युद्ध विनाश लाता है इस वजह से भारत आर्थिक और मानसिक स्तर पर कमजोर हो गया इस कमजोरी के कारण भारत का प्राचीन हाईटेक ज्ञान विलुप्त हो गया क्योंकि महाभारत के युद्ध में हाइड्रोजन बम का प्रयोग किया गया था महाभारत काल में इस परमाणु हथियार को ब्रह्मास्त्र कहा जाता था।कहा जाता है कि हाइड्रोजन बम के प्रयोग के कारण सिंधु नदी का जल स्तर अचानक से बढ़ गया और इस वजह से देखते ही देखते सिन्दू घाटी की सभ्यता का विनाश हो गया।


लेकिन भारत की संस्कृति और ज्ञान के कारण और महान राजायो विक्रमादित्य, चंद्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, चाणक्य, कृष्णदेव राय, पृथ्वी राज चौहान आदि के कारण भारत फिर विश्वविजयी और सोने की चिड़िया बना। सनातन धर्म से कई सम्प्रदाए निकले जैसे बुद्ध, जैन और सिख, कई संस्कृतियो का समन्वय हुआ, बहुत से आक्रान्ताओं के हमले हुए, कई सौ सालों तक देश गुलाम रहा, ऐसी अनेक विषमताओ और अनेक विभिन्नताओं के बावजूद भी भारत की पृथक् सांस्कृतिक सत्ता रही है। 15 अगस्त 1947 को हम फिर से एक स्वतंत्र भारत बन पाए।स्वतंत्रता  के  पश्चात्  हमारे  देश  ने उन्नति  की  हैं और हम आत्मनिर्भरता बन दुनिया मे फिर सिर उठाकर खड़े हुए जैसे सामाजिक  अर्थव्यवस्था  में  प्रगति,  वैज्ञानिक  आविष्कार,  सांस्कृतिक  रूप  में  समृद्धि,  शिक्षा  के  क्षेत्र  में  विकास,  खेती  के  उन्नत  तरीके,  तकनीकी  और  विज्ञान  और प्रौधोगिकी  का  समुचित  विकास,  चिकित्सा  के  क्षेत्र  में  अनुसंधान, उद्योगिक प्रगति आदि।


आज हम  इक्कीसवीं सदी में  जी  रहे  हैं।ऐसा कहा जाता है कि उन्नीसवीं सदी ब्रिटेन सदी, बीसवीं  सदी अमेरिकन और इक्कीसवीं सदी भारत  की सदी हैं।


आर्थिक क्षेत्र में IBM  इंस्टिट्यूट  फॉर   बिज़नेस  वेल्यु  की  रिपोर्ट  ‘ इन्डियन  सेंचुरी ’ के  अनुसार : भारत  एक   तेजी  से  बदलने  वाली  अर्थव्यवस्था  हैं। आने  वाले  वर्षों  में  भारत  को  सबसे  अधिक  उन्नति  करने  वाले  देशों  में  शामिल  किया  गया   हैं।


आज  भी  देखा  जाये,  तो  भारत  का  स्थान  दूसरा  ही  हैं  अर्थात्  अर्थव्यवस्था  के  मामले  में  हम  चाइना  के  बाद  विश्व  की  सबसे  बड़ी  आर्थिक  शक्ति  हैं।
प्राचीन  काल  से  ही  हम  चिकित्सा  के  क्षेत्र  में  अव्वल  रहे  हैं,  परन्तु  समय के साथ हम   पिछड़  गये  थे, लेकिन आज  स्थिति  कुछ  और  हैं।हमारे  देश  में  सभी  बीमारियों  का  इलाज ओर दूसरे  देशों की अपेक्षा सस्ते मे उपलब्ध  हैं।

कोरोना के दौर में भारत ने दुनिया के करीब 150 देशों में कई दवाइयों का निर्यात करके फार्मेसी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। भारतीय फार्मा उद्योग मात्रा के आधार पर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है।और सबसे ज्यादा जेनरिक दवाएं निर्यात करने वाला देश है। भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके पास अमेरिकी दवा नियामक यूएसएफडीए के मानकों के अनुरूप अमेरिका से बाहर सबसे अधिक संख्या में दवा बनाने के संयंत्र हैं।


अभी तक दुनिया मे 6 कोरोना वैक्सीन को अप्रूवल मिला है और जिसमे से भारत की 2 वैक्सीन है जिनमे से एक स्वेदशी है। जो देश दवाई दूसरे देशों से आयात करता था आज वो दुनिया को निर्यात कर रहा है।बहुत जल्द भारत औषधियों का निर्यात करने वाला विश्व का बड़ा देश बन जाएगा।


भारतीय परंपरा और संस्कृति विज्ञान पर आधारित है लेकिन मध्यकाल यानी मुगलों के आने के बाद देश में लगातार लड़ाइयाँ चलती रहने के कारण भारतीय वैज्ञानिक परंपरा का विकास थोड़ा रुका लेकिन खत्म नही हुआ।भारत में आधुनिक वैज्ञानिक परंपरा का विकास मुख्य रूप से ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के बाद से शुरू हुआ। परंतु काम-काज के सारे नियंत्रण अंग्रेजों के पास होने के कारण विकास कार्य नगण्य ही था। इसलिए आजादी के समय तक हमारा देश लगभग हर वस्तु, सुई, टूथपेस्ट जैसी रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर था।लेकिन स्वतंत्रता के बाद देश को विज्ञान के क्षेत्र नए पंख मिले नए प्रयोगशालाएं और अनुसंधान केंद्र स्थापित हुए और 21 शताब्दी तक भारत रूपी पक्षी उड़ने लगा और वो  विकासशील देशों में प्रथम स्थान पर आ गया।और दुनिया मे सातवे स्थान पर।आज भारत कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाने वाले दुनिया के कुछ गिने हुए अग्रणी देशों में से एक है।


नैनो तकनीक पर शोध के मामले में भारत दुनियाभर में तीसरे स्थान पर है।


अंतरिक्ष महाशक्ति के रुप में भारत का चौथा स्थान है
मंगलयान मिशन इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है। इसके अलावा इसरो ने एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित कर इतिहास रच दिया है। चंद्रमा पर राष्ट्रध्‍वज के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाला भारत चौथा देश और यान भेजने वाला छटवां देश बन गया है।


आज हमारे  देश के नया भारत बन कर उभर रहा है जिसको डिजिटल इंडिया का नाम दिया गया।   प्रत्येक  विभाग को कंप्यूटर और इंटरनेट से जोड़ा गया है। कोई भी जानकारी आपको कही जाए बगैर किसी भी समय आपको मिल सकती है। अब तो बजट भी डिजिटल बेस्ड हो गया। ‘ ई – कॉमर्स ’  जिसके  द्वारा  हम  घर  बैठे – बैठे  अपना  सामान  कम्प्यूटर  पर  खरीद  सकते  हैं  और  बेच  भी  सकते  हैं। आज हम इतने आत्मनिर्भर हो गए है कि अब हम “मेड फ़ॉर वर्ल्ड” की बात कर रहे है।


हमारे  देश  में  3  प्रकार  की  फौजें  हैं : थल  सेना,  जल  सेना  और  वायु  सेना।दुनिया मे जिनका स्थान चौथा हैं।आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत डिफेंस प्लेटफॉर्म और मिसाइल के निर्माण के मामले में अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। जहां हम पहले सिर्फ आयात करते थे आज हम अपने स्वेदशी रक्षा उपकरण को निर्यात भी कर रहे है।

भारत एक धरती का टुकड़ा नही बल्कि प्राचीन समृद्धि और सभ्यता का जीता जागता उदाहरण है।जो
भिन्न संस्कृतियों और भाषाओं को शांतिपूर्वक समेटकर आगे बड़ा| भारत विश्व में एक अकेला ऐसा देश है, जहां दो हजार से अधिक बोलियां, दो सौ भाषाएं, सौ से अधिक लिपियां, हजारों प्रकार की वेशभूषाएं, सैंकड़ों क्षेत्रीय व्यंजन, हजारों तरह की मिठाइयां और बारह महीने के तेरह पर्व मिलते हैं।
हमारे देश के ऊपर बाहर से आये अनेक आक्रान्ताओं ने बर्बरतापूर्ण आक्रमण किया हम पर राज भी किया लेकिन भारत वैसे ही अडिग रहा।कोई भी हमे बदल नही सका बल्कि जो भी यहाँ आये वो यहां के हो गए।


हमारे ऋषिमुनि, महापुरुष,हमारे वेद ओर विज्ञान,संगीत आदि ने जहां हमारे भारत की महान परंपराकी को दुनिया मे एक अलग पहचान बनाई  वही आज आर्थिक, वैज्ञानिक, सामरिक, शैक्षिक, तकनीकी, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, जीवन स्तर, प्रति व्यक्ति आय, विदेशी निवेश, विदेशी मुद्रा भंडार, GDP, उत्पादन और सेवाओं जैसे बहुत सारे क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति कर दुनिया को हैरान कर दिया है।जहां हम सबसे बड़े और स्वस्थ लोकतंत्र बनकर दुनिया को लोकतंत्र की ताकत दिख रहे है वही अनेकता में एकता दुनिया के लिए एक मिसाल बनी है।भारत के गौरव की गाथा इतनी बड़ी है कि लिखने के लिए शब्द कम पड़ जायेंगे। हमे गर्व होना चाहिए कि हमने ऐसे पवित्र भूमि पर जन्म लिया।


रिपोटर चंद्रकांत सी पूजारी

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