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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा पर सदन को संबोधित करते हुए किसानों और कृषि कानून की जरूरत पर अपनी बात रखी. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अभी तक जिनती भी सरकारें आईं है वह बड़े किसानों को तो लाभ पहुंचाती हैं लेकिन छोटे किसान हमेशा उस लाभ से वंचित रह जाते हैं.

पीएम ने कहा इससे पहले सभी दलों ने इस कानून की वकालत की लेकिन अब यूटर्न ले लिया, ऐसा क्यू भाई? और इस राजनीति न करने की भी अपील की. प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही किसानों को एक बार फिर से भरोसा दिलाया कि MSP था, है और आगे भी जारी रहेगा.

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सदन में अपनी बात रखते हुए पीएम मोदी ने कहा, जब लाल बहादुर शास्त्री जी कृषि सुधारों की पहल कर रहे थे उस वक्‍त भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. लेकिन वो पीछे नहीं हटे थे. तब लेफ्ट वाले कांग्रेस को अमेरिका का एजेंट बताते थे, आज मुझे ही वो गाली दे रहे हैं. पीएम ने कहा कि कोई भी कानून आया हो, कुछ वक्त के बाद सुधार होते ही हैं.

पीएम मोदी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि MSP है, था और रहेगा. पीएम मोदी ने सदन को बताया कि इस कानून के जरिए मंडियों को और मजबूत करने का काम किया जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है. 80 करोड़ लोगों को सस्ता राशन दिया जाता है, वो भी जारी रहेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी ने ये नही बताया कि आंदोलन क्यू, बस ये नही चाहिए कहते जा रहे हैं.उन्होंने फिर से अपील की किसान आंदोलन खत्‍म कर चर्चा करें. पीएम मोदी ने इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कुछ पंक्तियों का भी जिक्र किया.

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पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, मैं मनमोहन सिंह जी के एक बयान को कोट करता हूं. आदरणीय मनमोहन सिंह ने किसान को उपज बेचने की आजादी दिलाने और भारत को एक कृषि मार्केट बनाने के बारे में बोला था. आपको तो गर्व होना चाहिए कि मनमोहन जी ने कहा था- मोदी को करना पड़ रहा है.

जिन राज्यों में विपक्ष की सरकार है वहां भी उन्होंने इसे थोड़ा थोड़ा लिया ही है. उसके बावजूद विरोध. इस दौरान पीएम मोदी ने यह भी कहा कि मनमोहन सिंह कृषि सुधारों के पक्ष में थे. लेकिन कांग्रेस उनकी बात तो माने.

उन्‍होंने कहा, शरद पवार जी और कांग्रेस ने हमेशा कृषि सुधार की वकालत की. कर पाए या नहीं वो अलग बात है पर इस बारे में हमेशा बयान दिए. लेकिन अचानक यू टर्न ले लिया. राजनीति के लिए हो सकता है कि ये आवश्यक हो लेकिन कम से कम किसानों को तो ये कहते कि बदलाव ज़रूरी है.

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