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अयोध्या के धन्नीपुर में बनने वाली मस्ज़िद का रास्ता साफ हो गया है. धन्नीपुर में सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड को दी गई 5 एकड़ ज़मीन पर 2 महिलाओं के दावे के वाद को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सोमवार को ख़ारिज कर दिया.

दिल्ली की रहने वाली 2 महिलाओं ने दावा किया था कि प्रशासन ने मस्जिद बनाने के लिए जो 5 एकड़ ज़मीन अलॉट की है, वो उनकी है. सरकारी वकील रमेश कुमार सिंह ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जिस जमीन पर दावा किया गया है, उसका नम्बर महिलाओं की जमीन से अलग है.

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कोर्ट में दावा करने वाली महिलाओं के वकील ने कहा कि बिना तथ्यों की जांच किये जल्दबाजी में ये अर्ज़ी डाली गई है. इसको आधार मानते हुए कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी.

गौरतलब है कि राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला देते हुए 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या की सीमा के भीतर 5 एकड़ जमीन सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड को देने का आदेश दिया था. इसी आदेश के तहत पिछले साल अयोध्या प्रशासन ने रौनाही क्षेत्र के धन्नीपुर गांव में जमीन वक्फ बोर्ड को अलॉट की थी.

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इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन की तरफ से इस ज़मीन पर मस्जिद के अलावा अस्पताल और म्यूजियम बनाने की नींव इसी 26 जनवरी को रखी गई थी. इसके बाद दिल्ली की दो महिलाओं ने इस जमीन पर अपना दावा पेश करते हुए हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी, जिसको आज जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस मनीष कुमार की बेंच ने खारिज कर दिया.

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