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गजलांजली साहित्यिक संस्था की काव्य गोष्ठी में बुजुर्गो के प्रति श्रध्दा, महात्मा गांधी को दी श्रध्दांजलि


उज्जैन।
गजलांजली साहित्यिक संस्था की काव्य गोष्ठी डॉ. कृष्ण जोशी की अध्यक्षता में रूपांतरण संस्था के दशहरा मैदान स्थित सभागार में हुई।
गोष्ठी का आरंभ करते हुए से.नि. अतिरिक्त कलेक्टर कवि आरपी तिवारी ने गांधीजी पर लिखी अपनी रचना, सत्य अहिंसा अपरिग्रह युत, योध्दा दृढ़ संकल्पित थे, भारत माता के चरणों में तन, मन जीवन अर्पित थे, सुना कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को काव्यात्मक श्रध्दांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर शायर आरिफ अफजल ने अपनी गजल, कभी किसी को ऐसी सजा ना मिले, रहे बुजुर्गों में और दुआ ना मिले, सुनाकर बुजुर्गों के प्रति श्रध्दा व्यक्त की। इसी प्रकार ख्यात गजलकार विजयसिंह ‘साकित’ ने गजल, वो हादसात को दिलचस्प कहानी समझे, अश्क आंखों में भरे थे, जिन्हें पानी समझे, सुनाकर वाह वाह लूटी।

कवि एवं उपन्यासकार डीके जैन ने आज के परिवेश में शोर के बीच रहती आपसी चुप्पियों को अपनी रचना के माध्यम से प्रभावी ढंग से उद्घाटित किया, शोर के आकाश में पल तौलती है चुप्पियां, जुबां जब लाचार हो, तब बोलती है चुप्पियां। इसी प्रकार शायर कैलाश अकेला ने संदेशपरक रचना जो जैसा करता है, उसको वैसा करने दो, कोई कुछ भी कहता है तो उसको वैसा कहने दो प्रस्तुत की।

अंत में संस्था के वरिष्ठ छायावादी कवि डॉ. इसरार खान ने ब्रजभूमि में कृष्ण के बिना पहली होली पर राधा के हृदय की विरह वेदना को बहुत ही सुंदर ढंग से काव्य में निरूपित किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रध्दांजलि अर्पित कर गोष्ठी का समापन किया गया।

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