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देश के बेहतरीन लाइब्रेरी में शुमार होगा सीयूएसबीः कुलपति

सीयूएसबी में बिहार का पहला ऑटोमेटेड सिस्टम लाइब्रेरी का शुभारंभ।

डॉ रंगनाथन के चौथे नियम “सेव द टाइम ऑफ द रीडर” का हुआ पालन।

अब केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अंगूठे दबाकर मनपसंद पुस्तकें प्राप्त कर सकेंगे।

अश्वनी कुमार-

गया।दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) ने एक केंद्रीय पुस्तकालय को पूर्णतः स्वचालित कर एक कृतिमान स्थापित किया है। विश्वविद्यालय परिसर स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी अब पूर्णतः ऑटोमेटेड हो गया है | यानि अब बिना पंक्ति में लगे बिना लाइब्रेरी के पंजीकृत यूजर्स सिर्फ अंगूठे की सहायता से अपनी मनपसंद क़िताबें को कुछ ही क्षण में इश्यू करवा सकते हैं | रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन ( आरएफआईडी) नामक ऑटोमेटेड सिस्टम का उद्घाटन सीयूएसबी के कुलपति प्रोफेसर हरिश्चंद्र सिंह राठौर ने स्वयं को बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल करके पंजीकृत करते हुए किया। उन्होंने माई-लॉफ्ट एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर फॉर रिमोट एक्सेस ऑफ ई-रिसोर्सेज का भी उद्घाटन किया।

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इस अवसर पर कुलपति प्रो हरिश्चंद्र सिंह राठौर ने कहा कि मुझे ये बताते हुए गर्व हो रहा है कि सीयूएसबी ने पुरे सूबे में पूर्णतः ऑटोमेटेड प्रणाली को लॉंच कर कृतिमान स्थापित किया है।ये हम सबके लिए प्रसन्नता का विषय है जिसका श्रेय लाइब्रेरी में कार्यरत कर्मचारियों को जाता है इसके लिए लाइब्रेरी के पुस्तकालयाध्यक्ष एवं उप – पुस्तकालयाध्यक्ष प्रशंसा के पात्र हैं।उन्होंने आरएफआईडी के लिए इनफार्मेशन साइंटिस्ट श्री क्षितिज सिंह एवं माई-लॉफ्ट एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के लिए सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ० मो० गुलनवाज़ आज़म की सराहना की।

लाइब्रेरी के भविष्य की योजना के बारे में बताते हुए प्रोफेसर राठौर ने कहा कि 2 वर्षों के अंदर ही भव्य सेन्ट्रल लाइब्रेरी के भवन निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा और इसके निर्माण का कार्य सीपीडब्लूडी को दिया गया है।कुलपति ने कहा कि हमारी लाइब्रेरी काफी अच्छी है और मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में ये देश के बेहतरीन लाइब्रेरी में शुमार होगा।


लाइब्रेरी में लॉंच की गई दो ऑटोमेटेड सिस्टम के बारे ज़्यादा जानकारी देते हुए डॉ० प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि फ़ादर ऑफ लाइब्रेरी साइंस श्री एस० आर० रंगनाथन के द्वारा वर्ष 1932 में दिए गए लाइब्रेरी साइंस के चौथे नियम ( लॉ ) को अमली जामा पहनाया गया है।लाइब्रेरी साइंस के चौथे नियम में ‘ सेव दी टाइम ऑफ यूजर्स ‘ को प्रमुखता दी गई। जिसके परिपेक्ष में ही आरएफआईडी को अपनाया गया है ताकि लाइब्रेरी के उपभोक्ताओं यानि पाठकों को किताबों को निर्गत करवाने में सुविधा हो।सेंट्रल लाइब्रेरी के मुख्य प्रवेशद्वार को बायोमेट्रिक बना दिया गया है जिससे सिर्फ पंजीकृत यूज़र्स ही थंब इम्प्रैशन का इस्तेमाल कर लाइब्रेरी में प्रवेश कर सकते हैं |

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लाइब्रेरी में शुरू किए गए आरएफआईडी कियोस्क की मदद से यूजर्स बड़ी आसानी से थंब इम्प्रैशन से अपनी मनपसंद पुस्तकों को प्राप्त कर सकेंगे और उसके साथ एक स्लिप भी स्वतः मशीन से बाहर आएगी जिसे प्रवेशद्वार में खड़े गार्ड को दिखाकर बाहर जाया सकता है | वहीँ लाइब्रेरी के प्रवेशद्वार के बाहर ऑटोमेटेड बुक ड्राप बॉक्स का उपयोग कर बिना लाइब्रेरी के अंदर प्रवेश किए पुस्तक को लौटाया जा सकता है |

लाइब्रेरी के पंजीकृत यूजर्स को पुस्तक के इश्यू होने से लेकर उसे वापस होने तक की गतिविधियों की जानकारी ई – मेल के ज़रिये भेज दी जाएगी।किसी भी पुस्तक की वापसी के अंतिम दिन से दो दिन पहले ही स्वतः रिमाइंडर मैसेज प्राप्त हो जाएगा।अगर कोई यूजर समय पर पुस्तक वापस नहीं करते हैं तो उन्हें ऑटोमेटेड प्रणाली से रोज़ाना जुर्माने की राशि की जानकारी दी जाएगी |

पुस्तकालयाध्यक्ष ने बताया कि इस सिस्टम के अंतर्गत लाइब्रेरी में मौजूद 45 हज़ार पुस्तकों को आरएफआईडी टैग से लैस कर दिया गया है और इनमें माइक्रोचिप भी लगाया गया है जिससे पुस्तकों की चोरी नहीं हो सकती है।आरएफआईडी प्रणाली में कई आधुनिक तकनीक है जिससे लाइब्रेरी का सचांलन सुचारु और काफी सुगम तो होता ही है इसके साथ – साथ पाठकों को भी पुस्तकों के इश्यू से लेकर लौटाने तक कोई दिक्कत नहीं होगी |


आरएफआईडी के साथ माई-लॉफ्ट एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर फॉर रिमोट एक्सेस ऑफ ई-रिसोर्सेज के इस्तेमाल से लाइब्रेरी के यूजर्स आसानी से देश के किसी भी कोने में बैठकर सब्सक्राइब्ड ई-जर्नल्स, ई-बुक्स, ई-डेटाबेसज आदि को मोबाइल, टेबलेट, लैपटॉप और डेस्कटॉप पर एक्सेस कर सकते हैं | माई-लॉफ्ट प्रणाली को केन्द्रीय पुस्तकालय में इंटेग्रटे करने में असिस्टेंट लाइब्रेरियन डॉ० मो० गुलनवाज़ आज़म ने अहम भूमिका निभाई है जबकि आरएफआईडी के लिए इनफार्मेशन साइंटिस्ट श्री क्षितिज सिंह ने बैकएंड पर कार्य किया है |

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अंत में उप-पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ० पंकज माथुर ने कुलपति के साथ – साथ सभी सम्मानित अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। साथ ही साथ उन्होंने यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी के समस्त कर्मचारियों क्रमशः डॉ० मयंक युवराज, डॉ० मो० गुलनवाज़ आज़म,क्षितिज सिंह,वीरेंद्र कुमार शुक्ला, श्री मो० अरशद अली, देवेंद्र कुमार मिश्रा, सुधीर कुमार, अमरजीत कुमार सिंह, श्री जीत्यादित्य जना, स्नेहलता,अमित, कुलदीप कुमार और आकांक्षा के बहुमूल्य योगदान के लिए सराहना की |

गया (बिहार) से अश्वनी कुमार की एक रिपोर्ट

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