Domain Registration ID: DD9A736AA76EB45DBBFAF21E3264CDF2D-IN Editor - Neelam Dass, Add. - 105 Jawahar Marg, Ujjain M.P., India - Mob. N. - +91- 8770030644

श्री गणेश जी की उपासना से ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मिलती है मुक्ति–पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य

गोरखपुर! चन्द्रोदय रात्रि 8 बजकर 20मिनट पर चंन्द्रार्घ्य रात्रि 9 बजकर 42 मिनट के बाद माघ कृष्ण चतुर्थी व्रत को लेकर जनमानस में भ्रम की स्थिति को देखते हुए भारतीय युवा जनकल्याण समिति के संस्थापक व संरक्षक तथा भारतीय विद्वत महासंघ के महामंत्री पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 31जनवरी दिन रविवार को तृतीया तिथि रात्रि 9 बजकर 41मिनट तक है, उसके बाद चतुर्थी तिथि लग जा रहा है!

जो 1फरवरी को रात्रि 7 बजकर 57 मिनट तक है तथा चंन्द्रोदय रात्रि में 9:21पर हो रहा है.जो पंचमी तिथि लग जा रहा है! माघ कृष्ण चतुर्थी व्रत में अर्घ्य का महत्व विशेष माना गया है तथा तृतीया युक्त चतुर्थी विशेष फलदायी एवं शुभ माना गया है जबकि पंचमी युक्त चतुर्थी व्रत को करना निषेध है.भले दिन भर तृतीया तिथि है और चतुर्थी तिथि में अर्घ्य दिया जाना शुभकारी है! इस आधार पर 31 जनवरी को ही श्री गणेश चतुर्थी व्रत रहकर रात में 9 बजकर 42 मिनट के बाद जब चतुर्थी लग जा रही है!

इसे भी पढ़े : दिल्ली में किसान की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई — दिग्विजय सिंह

तब अर्घ्य देवें यह शास्त्र सम्मत है! पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने यह भी बताया कि इस दिन गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी इसलिए यह माघ कृष्ण चतुर्थी का महत्व और ही पुण्यदायनी है,माघ महीने में पड़ने वाली सकटा चौथ का विशेष महत्व माना गया है। इसे सकट चौथ, संकटाचौथ, तिलकुट चौथ आदि नामों से जाना जाता है। सकट चौथ के दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु की कामना के लिए भगवान श्री गणेश की उपासना करती हैं।

इस तिथि को दिन भर निराहार रहकर शाम को चंन्द्रोदय के बाद गणेश जी की मूर्ति पर तिल,गाजर,शकरकंद, सुथनी,लौकी, मिठा अर्पण कर धूप दीप आदि से पूजन के पश्चात चन्द्रमा को देखते हुए अर्घ्य देकर परिक्रमा करें, तत्पश्चात प्रसाद ग्रहण करना चाहिए!गणेश जी की उपासना से ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है.

इस प्रकार करने से सभी मनोअभिलाषित कार्य पूर्ण होते हैं तथा गणेश जी की कृपा से सभी कष्टों का निवारण होता है विशेष रूप से महिलाएं इस व्रत को जरूर करें! इस व्रत के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लें,पूजा स्थान पर चौकी रखें और उस पर गंगाजल छिड़कें, पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें, उनके समक्ष धूप, दीप और अगरबत्ती जला दे, अब, गणेश जी को पीले फूलों की माला और दूर्वा घास चढ़ाएं, इसके उपरांत गणेश चालीसा, गणेश स्तुति और गणेश स्तोत्र का पाठ करें। साथ ही गणेश मंत्रों का भी जाप करें। गणेश आरती कर भगवान गणेश को भोग लगाएं। मुमकिन हो तो मोदक का भोग लगाएं

Leave a Reply