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उज्जैन।
जिले में राशन की दुकानों का संचालन करने वाले दुकानदारों द्वारा साबून, तेल, सर्फ और काॅस्मेटिक्स जैसी वस्तुओं को बेचने का स्वप्न जरूर देखा जा रहा हो लेकिन इसकी अनुमति कब तक सरकार देगी, यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो सका है।

खाद्य विभाग के सूत्रों का यह कहना है कि फिलहाल यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में है, फिर भी  नये  वित्तीय वर्ष मार्च माह के बाद जरूर   राशन की दुकानों को किराना की दुकान में तब्दील करने का स्वप्न जरूर पूरा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दुकानें बहुउद्देशीय हो चुकी हैं, ऐसे में भी सरकारी राशन की दुकानें अपने परंपरागत स्वरुप से बाहर नहीं निकल पा रही हैं।

इस वजह से इन दुकानों के संचालकों को अब भी सीमित आय के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई और सीमित आय की वजह से ही कई बार इन दुकानों के संचालकों द्वारा राशन की कालाबाजारी तक की जाती है। दो साल पहले इन दुकानों में कई अन्य तरह की वस्तुओं की बिक्री की योजना राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई थी, लेकिन उस पर अब तक अमल नहीं हो सका है। बताया गया है कि फिलहाल इस योजना को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

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इससे यह तय हो गया है कि अब इन दुकानों पर परंपरागत रुप से मिलने वाला केवल गेहूं, चावल, नमक, शक्कर और केरोसिन ही मिलेगा। दरअसल पूर्व में जब राशन दुकानों को किराना दुकानों में बदलने की योजना बनाई गई थी , जब तर्क दिया जा रहा था कि ऐसा करने के पीछे गरीबों को रियायती दर पर किराना सामान उपलब्ध कराना है।

गौरतलब है कि प्रदेश में इस तरह की करीब 24 हजार से अधिक राशन दुकानें हैं। इन दुकानों से दिए जाने वाले सामान में बीते डेढ़ दशक में सिर्फ नमक को ही विक्रय किये जाने वाले सामानों की सूची में जगह दी गई है। यह बात अलग है कि इन दुकानों से कभी-कभी तुअर दाल का वितरण भी किया जाता है, लेकिन यह तभी किया जाता है जब आपदा की स्थिति बनती है।

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