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इंदौर, – हाल ही में 65 वर्षीय एक व्यक्ति अनूठे स्मार्ट फोन इनेबल्ड ब्लूटुथ आधारित माॅनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए कार्डियक रिदम मैनेजमेन्ट डिवाइस इम्प्लान्ट कराने वाला पहला मरीज़ बन गया। इंदौर के विशेष-ज्युपिटर अस्पताल में डाॅ अनिरुद्ध व्यास, कन्सलटेन्ट इलेक्ट्रोफिज़ियोलोजी, पेसिंग एण्ड हार्ट फेलियर के नेतृत्व में डाॅक्टरों की एक टीम ने इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

मरीज़ वेंट्रीकुलर एरिथमिया से पीड़ित था और आधुनिक तकनीक की मदद से उसमें अबाॅट का इम्प्लान्टेबल कार्डियोवर्टर डीफाइब्रिलेटर इम्प्लान्ट किया गया। अबाॅट की ओर से पेश  की गई यह आधुनिक डिवाइस कार्डियक एरिथमिया और हार्ट फेलियर के मरीज़ों के लिए सबसे आधुनिक हार्ट रिदम मैनेजमेन्ट उपलब्ध कराती है।

ब्लूटुथ इनेबल्ड डिवाइस को मरीज़ की छाती में प्लेस कर दिया जाता है जो हार्ट रिदम को माॅनिटर करती है और अनियमित हार्टबीट्स को पहचान कर समय रहते मरीज़ की जान बचाने में मदद करती है। यह तकनीक मरीज़ की अपनी स्मार्टफोन ब्लुटुथ कनेक्टिविटी के माध्यम से रिमोट माॅनिटरिंग की सुविधा उपलब्ध कराती है।

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‘‘पिछले सालों के दौरान कार्डियक केयर में आधुनिक तकनीकों का विकास तेज़ी से हुआ है, मरीज की देखभाल की बात हो या त्वरित निदान की, डाॅक्टर और मरीज़ के बीच के कनेक्शन को नए आयाम मिले हैं। इस तरह की रिमोट माॅनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज़ हमेशा अपने फिज़िषियन के संपर्क में रहता है, जो कार्डियक केयर का महत्वपूर्ण पहलु है।’’ डाॅ अनिरुद्ध व्यास, कन्सलटेन्ट ने प्रक्रिया के बाद कहा।

डाॅक्टर अक्सर उन मरीज़ों में कार्डियक विकारों के चलते अचानक होने वाली मौतों से बचाव के लिए  आईसीडी की सलाह देते हैं जिनका कार्डियक फंक्षन धीमा हो और जिनमें असामान्य हार्ट रिदम के चलते जान जाने तक की संभावना हो। इस तरह के असामान्य रिदम को वेंट्रीकुलर एरिथमिया कहा जाता है, यह अक्सर तब होता है, जब हार्ट बीट बहुत तेज़ हो जाए और हार्ट प्रभावी रूप से रक्त को पम्प न कर सके। नया रिमोट माॅनिटरिंग ऐप स्मार्टफोन कम्पेटिबल है और इसे आसानी से ब्लूटुथ से कनेक्ट किया जा सकता है। यह स्ट्रीमलाईन कम्युनिकेषन में मदद करता है और डाॅक्टर और मरीज़ के बीच संपर्क बनाए रखता है।

उदाहरण के लिए ऐप के द्वारा मरीज़ अपनी हेल्थकेयर टीम की निगरानी में रहता है, टीम उसकी ट्रांसमिषन हिस्ट्री और डिवाइस के परफोर्मेन्स को माॅनिटर करती रहती है। ऐप के ज़रिए फिजियिषयन रिमोट तरीके से मरीज़ को माॅनिटर कर सकता है, जिससे असिम्प्टोमेटिक एपिसोड्स और ट्रांसमिषन को भी पहचाना जा सकता है और समय पर मरीज़ को उचित देखभाल उपलब्ध कराई जा सकती है।

रिमोट माॅनिटरिंग के सकारात्मक प्रभाव प्रमाणित हो चुके हैं, ये मरीज़ को बेहतर परिणाम देते हैं। इस तरह की डायनामिक तकनीकें, खासतौर पर जब मरीज़ के अपने स्मार्टफोन के माध्यम से उपयोग की जाती हैं, तो वे किसी भी समय, रियल टाईम में अपने डाॅक्टर से कनेक्टेड रहते हैं, फिर चाहे वे घर से बाहर ही क्यों न हों। हमारे ये प्रयास ऐसी आधुनिक तकनीकों के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्षाते हैं जो मरीज़ों, उनकी देखभाल करने वालों और डाॅक्टरों के बीच की कनेक्टिविटी में सुधार ला सकती हैं।

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