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मां ने पुलिसकर्मियों पर लगाए आरोप परिजनों का कहना चिमनगंज थाने में पहले से था बंद


पैसे नहीं दिया तो महाकाल पुलिस ने बना दिया डकैत मेरा बेटा निर्दोष है वह कोई डकैत नहीं। पुलिस कर्मियों को हमने पैसे नहीं दिए तो उसे झूठा फंसा दिया। 2 दिन पहले वह चिमनगंज थाने में बंद था और उसे बाद में महाकाल थाने लाकर डकैत बना दिया।

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यह बात गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए महाकाल थाने में हाल ही में डकैती में बंद हुए शारिक उर्फ जैरी के परिजन ने कही। जेरी के पिता साजिद और मां यासमीन ने बताया कि मेरा बेटा मारपीट के केस में 19 तारीख से चिमनगंज थाने में बंद था।

रविवार 22 नवंबर को चिमनगंज थाने के आरक्षक ने हमें फोन किया तथा जैरी को कोर्ट पेश करने के लिए 20 हजार रुपए की मांग की। हम गरीब लोग पैसों की व्यवस्था नहीं कर पाए ऐसे में सोमवार दोपहर को जब मैं जेरी को खाना देने गई तो वह मुझे चिमनगंज थाने नहीं मिला।

वहां से बताया कि उसे महाकाल पुलिस पूछताछ के लिए ले गई है। महाकाल थाने पर मुझे कोई भी पुलिसकर्मी संतोषप्रद जवाब नहीं दे रहा था। मंगलवार 24 नवंबर को हमें पता चला कि उस पर डकैती का केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पूरा प्रकरण गलत दर्ज किया।

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इसमें मेरा बेटा निर्दोष है न्याय की मांग को लेकर परिजनो ने आईजी ऑफिस में भी आवेदन दिए हैं। इन बिंदुओं पर हो जाए 1 चिमनगंज थाने के सीसीटीवी फुटेज चेक किए जाएं। 2 महाकाल खाने के भी फुटेज चेक किए जाए। 3 परिजनों का आरोप है जब्ती में जो भी हथियार लिए गए हैं वह भी पुलिस लाई है। 4 जैरी के परिजन को चिमनगंज थाने का आरक्षक फोन क्यों लगा रहा था। 5 सभी आरोपियों के मोबाइल लोकेशन की साइबर से जांच कराई जाए। 

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