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रुपये नहीं देने पर तहसीलदार ने आपत्तिकर्ता के विरुद्ध आदेश करने की भी धमकी भी दी

खुद तहसीलदार भ्रष्ट्राचार के मामले में फंस चुके

तहसीलदार शर्मा शिकायत जिला प्रशासन व लोकायुक्त एसपी को की, पद का दुरुपयोग व रिश्वत का लगाया आरोप


उज्जैन। ग्राम जीवनखेड़ी के निवासी राजेन्द्र चौपड़ा व भाई पारस ने अपनी बहन कलाबाई व बहन के पुत्र राजेश, नरसिंह, विजय व दूसरी बहन टमाबाई व पुत्र मोहन, जितेंद्र व ठाकुर के द्वारा पुश्तेनी जमीन के जाली दस्तावेज बनाकर उज्जैन तहसील के तहसीलदार आदर्श शर्मा के न्यायालय में आवेदन किया था जिसकी सूचना भाई राजेन्द्र व पारस को लगी।

तब उन्होंने उक्त नामांतरण को खारिज कराने हेतु अपनी आपत्ति इंदौर की अधिवक्ता सुनीता तिवारी के माध्यम से तहसीलदार आदर्श शर्मा के न्यायालय में दिनांक 19 अक्टूबर 2020 को लिखित में दर्ज कराई थी, जिस पर तहसीलदार आदर्श शर्मा ने अधिवक्ता की अनुपस्थिति में आपत्तिकर्ता राजेन्द्र व पारस को अपने चेम्बर में बुलाकर पांच लाख रुपयों की मौखिक मांग की रुपये नहीं देने पर तहसीलदार ने आपत्तिकर्ता के विरुद्ध आदेश करने की भी धमकी भी दी थी। लेकिन आपत्तिकर्ता राजेन्द्र व पारस ने तहसीलदार की बात को नहीं माना और असंवैधानिक तरीके से पद का दुरुपयोग कर गलत आदेश जारी कर दिया, जिसमें खुद तहसीलदार भ्रष्ट्राचार के मामले में फंस चुके हैं।

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तहसीलदार ने अपने आदेश में लिखा है कि उन्हें उक्त प्रकरण क्रमांक 0093/अ-6/2020-21 में किसी व्यक्ति, संस्था या अधिवक्ता द्वारा कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण उक्त प्रकरण में एक पक्षीय कार्रवाही करते हुए नामान्तरण आदेश जारी किया जाता है किन्तु कुछ दिनों पूर्व आपत्तिकर्ता राजेन्द्र, पारस की अधिवक्ता होने से मैंने उक्त प्रकरण की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर ली थी, जिस पर तहसीलदार द्वारा प्रोसिडिंग में आपत्ति का दर्ज होना लिखित में दर्ज है।

अत: उक्त मामले में मेरे अधिवक्ता सुनीता तिवारी द्वारा पक्षकारों की ओर से जिला कलेक्टर, कमिश्नर उज्जैन सम्भाग व लोकायुक्त एसपी उज्जैन को की है, साथ ही शिकायत के माध्यम से मांग की है कि तहसीलदार आदर्श शर्मा, पटवारी पर पद का दुरुपयोग व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया जाए।

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