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जनप्रतिनिधियों की खामोशी चर्चा में


सतना। लोक निर्माण विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की निगरानी में 3 साल की गारंटी में करोड़ों की लागत से संविदाकारों द्वारा बनवाई गई सतना-सेमरिया, रिंग रोड, सगौनी से जेपी सीमेंट प्लांट, सकरिया से सरबहना मार्ग की सड़कें महज 6 माह के अंतराल में काली से सफेद हो गई। इस आशय का सनसनीखेज खुलासा तत्कालीन एसडीओ सुधीर शुक्ला ने मुख्य अभियंता रीवा और कार्यपालन यंत्री सतना को सौंपे अपने जांच प्रतिवेदन पर किया है।

प्रतिवेदन पर उन्होंने संविदाकारों को लिखित में स्पष्ट चेतावनी भी दी थी कि वे अपने वांछित सुधार कार्य को अविलम्ब पूर्ण करें, अन्यथा अनुबंध की शर्तों के मुताबिक उनका नाम काली सूची में डालने के साथ परफारमेन्स की राशि राजसात करने की वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। हैरानी की बात तो यह है कि 2 माह का समय गुजर जाने के बावजूद भी संविदाकारों द्वारा उपरोक्त सड़कों का सुधार कार्य नहीं करवाया गया और न ही विभागीय अधिकारियों ने संबंधितों के खिलाफ इस मामले में अब तक कोई कार्यवाही की। फिलहाल, इस मामले में जनप्रतिनिधियों की खामोशी भी लोगों की चर्चा का विषय है।

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विभागीय सूत्रों के मुताबिक सतना-सेमरिया मार्ग में 579.13 लाख की लागत से स्वीकृत 41.20 किमी की सड़क के निर्माण का ठेका अनुबंध क्रमांक 65 वर्ष 2019-20 में दिनांक 03/10/19 को संविदाकार अरुण सिंह मिला था। इनके द्वारा यह कार्य जून 20 में पूर्ण कर लिया गया। तत्कालीन एसडीओ सुधीर शुक्ला ने निरीक्षण के दौरान इस नवीनीकरण के कार्य को गुणवत्ताविहीन पाया और इस आशय का जांच प्रतिवेदन मुख्य अभियंता रीवा और कार्यपालन यंत्री सतना को पत्र क्रमांक 485 के जरिए दिनांक 28/09/20 को सौंपा, जिसमे उन्होंने वांछित सुधार कार्य को अविलंब पूर्ण करने का लेख करते हुए कार्य के पूर्ण न होने की स्थिति में संविदाकार का नाम काली सूची में डालने के साथ परफारमेन्स की राशि राजसात करने की स्पष्ट चेतावनी भी दी।


इसी तरह परफारमेन्स गारंटी के अंतर्गत सतना रिंग रोड के निर्माण कार्य का भी ठेका संविदाकार अरुण सिंह को ही मिला। इनके द्वारा यह कार्य 04/11/2019 को पूर्ण किया गया। यहां के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण तत्कालीन एसडीओ सुधीर शुक्ला ने दिनांक 25/09/20 को किया, जहां उन्होंने संविदाकार के कार्य को गुणवत्ताविहीन पाया। इसी दिवस पत्र क्रमांक 480 के जरिए उन्होंने मुख्य अभियंता रीवा और कार्यपालन यंत्री सतना को सौंपे जांच प्रतिवेदन में साफ-साफ लेख किया कि रिंग रोड 2 किमी पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। सभी आइटमों की पर्याप्त मात्रा का प्रावधान होने के बावजूद भी पूरे भाग में रिवलिंग (क्षरण) होकर पाट हॉल्स (पेच) 6 माह में ही निर्मित हो गए हैं। जिससे शासन को अपूर्ण क्षति हुई है।


यही हाल सगौनी से जेपी सीमेंट प्लांट मार्ग का भी बताया जाता है। इस मार्ग में 127. 03 लाख की लागत से स्वीकृत 2.3 किमी प्लान वर्क सड़क के निर्माण का ठेका अनुबंध क्रमांक 61 वर्ष 2018-19 में दिनांक 07/09/18 को मेसर्स एएएस ग्रुप को मिला था। तत्कालीन एसडीओ सुधीर शुक्ला ने दिनांक 18/09/20 को यहां निरीक्षण किया, जहां उन्होंने संविदाकार के कार्य को गुणवत्ताविहीन पाया। दिनांक 21/09/20 को पत्र क्रमांक 449 के जरिए उन्होंने अपने जांच प्रतिवेदन में डामरीकरण हो जाने के पश्चात 50 से 60 प्रतिशत मार्ग के ध्वस्त होने का लेख किया। साथ ही पूरे मार्ग में शीलकोट का नामोनिशान न होने की जानकारी दी। पत्र में यह भी अवगत कराया गया कि अभी हार्ड शोल्डर का कार्य भी पूर्ण नहीं किया गया और तो और 6 माह के अंतराल में यहां की सड़कों के जर्जर हालत में होने का जिक्र भी किया।


इसी तरह परफारमेन्स गारंटी के अंतर्गत वर्ष 2018-19 में अनुबंध क्रमांक 09 के तहत 24/04/18 को 29.14 लाख की लागत से स्वीकृत सकरिया-सरबहना मार्ग की 6.00 किमी (मजबूतीकरण) सड़क का ठेका भी मेसर्स एएएस ग्रुप को मिला। यह कार्य 15/06/19 को पूर्ण किया गया। इस मार्ग पर हुए निर्माण कार्य का निरीक्षण तत्कालीन एसडीओ सुधीर शुक्ला ने दिनांक 29/09/20 को यहां निरीक्षण किया। यहां भी उन्होंने संविदाकार के कार्य को गुणवत्ताविहीन पाया। इसी दिवस पत्र क्रमांक 492 के जरिए उन्होंने अपने जांच प्रतिवेदन में उक्त मार्ग के 50 से 60 प्रतिशत ध्वस्त होने की बात का उल्लेख किया। साथ ही पूरे मार्ग में शीलकोट का नामोनिशान न होने की जानकारी दी। पत्र में यह भी अवगत कराया कि 6 माह के अंतराल में यहां की सड़कों की सूरत देखने लायक नहीं रह गई हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि उपयंत्री व तत्कालीन एसडीओ द्वारा नवीनीकरण कार्य की समय-समय पर देखरेख नहीं कि गई एवं इस मामले में बेहद उदासीनता बरती गई है।


भ्रष्ट उपयंत्री के सिर पर किसका हाथ


अपने कथित कारनामों के चलते सदैव सुर्खियों में रहने वाले एके निगम एसडीओ हैं या उपयंत्री, इस सवाल का सही जबाब फिलहाल उनका विभाग ही बतला सकता है। नियमन, कोई भी व्यक्ति एक साथ दो पदों पर आसीन नहीं हो सकता। लेकिन मजे की बात तो यह है कि अपने एके निगम सतना हवाई पट्टी क्षेत्र के उपयंत्री के साथ-साथ नागौद उपसंभाग के एसडीओ भी हैं। सूत्रों के मुताबिक सतना की जितनी भी बड़ी-बड़ी सड़कें हैं, उनके उपयंत्री भी निगम जी ही हैं।

मुख्य अभियंता रीवा द्वारा एसडीओ बनाम उपयंत्री एके निगम को उनकी काली करतूतों के चलते दिनांक 30/09/20 को जारी पत्र क्रमांक 2374 के जरिए हवाई पट्टी सतना एवं उप संभाग सतना के समस्त अतिरिक्त प्रभार से कार्यमुक्त कर दिया गया था। इस कार्यवाही के बाद तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एचएल वर्मा व वर्तमान एसडीओ बृजेश सिंह ने भी उपयंत्री निगम को कार्यमुक्त होने के आदेश जारी किए। बताते हैं कि इस दौरान विभाग द्वारा जब हवाई पट्टी उप संभाग का प्रभार उपयंत्री नारेन्द्र ताम्रकार व रामचंद्र शुक्ला को सौंपा गया, तो कार्यमुक्त एसडीओ बनाम उपयंत्री एके निगम ने उन्हें अपना चार्ज नहीं दिया।

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सूत्रों के मुताबिक एसडीओ के कहने पर दोनों उपययंत्री दिनांक 12/11/20 को हवाई पट्टी कार्यालय जाकर रजिस्टर में चार्ज (यज़्यूम) कर इस आशय की सूचना से कार्यपालन यंत्री और एसडीओ कार्यालय को अवगत कराया। कहते हैं कि उपयंत्रियों के चार्ज लेने से बौखलाए कार्यमुक्त हुए उपयंत्री एके निगम ने हवाई पट्टी जाकर उनके यज़्यूम वाले पन्ने को फाड़कर दूसरा पन्ना कथित रजिस्टर पर चिपका दिया और उस पर अपने हस्ताक्षर कर दिए। कार्यमुक्त उपयंत्री निगम के इस कारनामें की लिखित शिकायत प्रभारी उपयंत्री रामचंद्र शुक्ला द्वारा कार्यपालन यंत्री बीके विश्वकर्मा व एसडीओ ब्रजेश सिंह को कर दी गई है।

इतनी अंधेरगर्दी करने के बाद भी मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री रीवा व कार्यपालन यंत्री सतना द्वारा अनुशासनहीन उपयंत्री के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं किए जाने से विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। जबकि ऐसी स्थिति में तो उपयंत्री निगम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया जाना चाहिए और इनके कार्यों की जांच भी एक कमेटी बनाकर की जानी चाहिए। लेकिन रीवा संभाग एवं भोपाल में बैठे अधिकारी इस गंभीर मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे। जाहिर है कि कथित भ्रष्ट अधिकारी के सिर पर वरिष्ठ अधिकारियों का हाथ है।


जांच तो दूर, आंच तक नहीं आई


गौरतलब हो कि भ्रष्ट अधिकारियों की निगरानी में सतना हवाई पट्टी सहित उपरोक्त सड़क मार्गों पर करोड़ों की लागत से करवाए गए गुणवत्ताविहीन निर्माण कार्यों का मामला सत्ता पक्ष के सांसद गणेश सिंह, विधायक द्वय जुगुल किशोर बागरी व प्रदीप पटेल द्वारा बड़े जोरशोर के साथ उठाया गया था। मामले को संज्ञान में लेते हुए लोक निर्माण विभाग के मंत्री गोपाल भार्गव ने कमेटी गठित कर इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाने के साथ दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही किए जाने के सख्त निर्देश भी दिए थे। लेकिन जांच तो दूर, अब तक संबंधितों को कोई आंच भी नहीं आई। सब अपनी-अपनी पहुच और पकड़ के दम पर वहीं के वहीं टिके हुए हैं और भ्रष्टाचार की नई इबारत भी लिख रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये भ्रष्ट अधिकारी सरकार पर भारी पड़ रहे हैं। यदि ऐसा नहीं, तो आखिर इन भ्रष्ट अधिकारियों पर किनकी कृपा बरस रही है।


एक खबर यह भी


विभागीय सूत्रों की मानें तो, लोक निर्माण विभाग में ज्यादातर निर्माण कार्य तो कागजों पर ही हो जाते हैं। निर्माण कार्य में गुणवत्ता विहीन डामर का जमकर इस्तेमाल होता है, जिससे सड़कें 6 माह के अंतराल में काली से सफेद हो जाती हैं। भारी मात्रा में डामर होने के बावजूद भी विभाग पैच वर्क के टेंडर निकालता है। काली कमाई के चक्कर में विभागीय अधिकारी बनी-बनाई सड़कों के भी टेंडर लगवाते हैं। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा शासकीय बिल्डिंगों के मरम्मतीकरण और उनकी पुताई के कार्य को 40 से 45 पर्सेंट के बिलों में लिए जाने की भी खबर है। सूत्रों के मुताबिक साल के अंत में शासकीय बिल्डिंगों की मरम्मत एवं पुताई के कार्य में विभागीय अधिकारी शासकीय राशि का बंदरबांट करते हैं।

सतना से सलिल कुमार नामदेव की रिपोर्ट

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