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सुसनेर से यूनुस खान लाला की रिपोर्ट चिरंतन न्यूज़ के लिए

 शहर की प्राचीन धरोहर जो शहर की आन बान शान है इनकी सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। एक और हर साल जहां दिपावली पर्व के दौरान पूरा शहर रंग और रोगन से जगमग आ जाता है वहीं दूसरी ओर शहर की धरोहरों की उपेक्षा ही मिल रही है । प्राचीन समय में नगर की सुरक्षा के लिए बनाए गए प्रमुख दरवाजे अंधेरे में डूब रहे हैं ,और कई दरवाजे तो र्जिण र्शिण  होकर समाप्त होने की अवस्था में है ,अब यह धरोहर नगर के नागरिकों का मुंह चिढ़ाते हुए बयां कर रहे हैं , कि अब तो दीपावली पर हमारी सुध ले लो नगर की सरकार । अभी दीपावली पर्व पूर्व इन धरोहरों को र्जिण र्शिण होने वाले दरवाजों को सुधार वाकर रंग रोगन करवा सकता है अभी समय है। 14 नवंबर को होने वाले दीपावली पर्व में 10 दिन शेष है अभी काफी समय है शेेेेष समय रहते इस ओर ध्यान दिया जा सकता है । पुराने समय में इन दरवाजों की छटा देखने को ही बनती थी और  अब यह जिम्मेदारों की ही उपेक्षा का शिकार बने हुए हैं । सालों पुराने इन दरवाजों में शहर का हाथी दरवाजा और मवड़ी दरवाजा प्रमुख हुआ करते थे ।कभी इन धरोहरों पर लकड़ी के बड़े-बड़े दरवाजे भी लगा हुआ करते थे । लेकिन समय के साथ-साथ में लकड़ी के दरवाजे कहां गुम हो गए किसी को पता ही नहीं ।हाथी दरवाजे के नीचे से तो हाथी निकला करते थे इसलिए इस दरवाजे का नाम हाथी दरवाजा पड़ गया सुसनेर नगर शह सुवा नगर था तभी से शहर के अंदर व बाहर जाने का यह एक मात्र प्रमुख दरवाजा बना हुआ था । इनमें हाथी दरवाजा और मवडी दरवाजा शामिल है । अन्य का अस्तित्व समाप्त हो चुका है ।

चार दरवाजों में से दो शेेष— 

प्राचीन समय में सुवा नगर में रहने वाले राजा महाराजाओं ने सुरक्षा की दृष्टि से चारों और नगर कोर्ट की दीवार बनाकर के चार से पांच बड़े बड़े दरवाजों से नगर सुरक्षित रखा था । किंतु आधुनिक युग में दीवार के साथ-साथ यह दरवाजे भी गायब होते जा रहे हैं । पहले जहां खिड़की दरवाजा , हाथी दरवाजा , मवडी दरवाजा , पिड़ावा दरवाजा सहित कई अन्य दरवाजे बनाए गए थे । अब उनमें से मात्र दो ही दरवाजे शेष बचे हैं रंग रोगन की जगह लगे फ्लेक्स पोस्टर दीप उत्सव के पर्व पर दरवाजे पर रंग रोगन किया जा कर आकर्षक विद्युत साज-सज्जा से सजाया जाना चाहिए था । आज वहां अपनी दुर्दशा पर नगर वासियों का मुंह चढ़ा रहा है ।आलम यह है कि हाथी दरवाजे पर प्रचार-प्रसार की सामग्री लगी हुई है तो कुछ जगहों पर फ्लेक्स बैनर जो इसकी सुंदरता पर दाग लगा रहे हैं । समय रहते नगर परिषद के जिम्मेदारों को इन्हें हटा कर इस दरवाजे के सौंदर्यीकरण पर ध्यान देना चाहिए ।

इनका कहना 

नगरकोट की दीवार में स्थित प्राचीन दरवाजे नगर की धरोहर है । इनमें से हाथी दरवाजा और महोडी दरवाजा को परिषद ने सजाया संवारा भी है और जो बच गए हैं उनके लिए भी कार्य योजना बनाई जाएगी । परिषद के द्वारा दरवाजों पर रंग रोगन किया जाएगा साथ ही उसे और सुंदर बनाए जाने की कार्य योजना बनाई जाएगी।

संतोष सैनी मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगर परिषद सुसनेर

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