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उज्जैन

 

आज हम सरकार का ध्यान हमारा समाचार के माध्यम से आकर्षित कराना चाहते हैं।
उज्जैन के तत्कालीन पुलिस कप्तान मनोज कुमार सिंह लगभग 35 दिन तक कोरोनावायरस से लड़ते रहे और शहर की मानिटरिंग के साथ साथ पेट्रोलिंग भी लगातार अपने सूचना तंत्र के आधार पर करते रहे।


कई प्रकार के अभियान चलाकर अपराधों का ग्राफ निम्न स्तर पर लाने का काम तत्कालीन पुलिस कप्तान मनोज कुमार सिंह द्वारा किया गया।


जब कोरोनावायरस ने उनको अपनी चपेट में ले लिया था उस समय प्राचीन मंदिर महाकालेश्वर के अलावा अन्य मंदिरों में पंडित पुजारी उनके स्वस्थ होने की पूजा अर्चना करते रहे।


आम जनता के बीच में से जो पुलिस का डर था उस डर को समाप्त करने का कार्य उज्जैन पुलिस कप्तान मनोज कुमार सिंह द्वारा अभियान चलाकर किया गया।
जब अचानक बेगुनाह होने के बाद भी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पर इस प्रकार की सरकार की गाज गिरना शहर के लिए एक दुखद घटना के बराबर हैं।


आम जनता और कई नेताओं में आपस में चर्चा हो रही है सरकार ने अपनी रोटी सेकने के लिए एक अच्छे पुलिस अधीक्षक का स्थानांतरण कर दिया।


कभी भी सरकार नहीं चाहती की शहर से माफिया अपराधी गुंडे या अन्य प्रकार के असामाजिक तत्व के लोगों का समापन हो ऐसा आम जनता के बीच में चर्चाएं चल रही है।

यदि हटाना ही था तो इन विभागों पर कार्रवाई क्यों नहीं।?


उज्जैन में शराब कांड के कारण जो 18 लोगों की जान गई है उसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका आबकारी विभाग की होती है और उसके बाद नगरनिगम के जवाबदार अधिकारियों की होती हैं।


सरकार ने हमारे समाचार के माध्यम से आबकारी विभाग के अधिकारी केसी अग्निहोत्री का स्थानांतरण तो कर दिया लेकिन उनको निलंबित नहीं कर पाए जबकि ऐसे अधिकारियों को निलंबित भी नहीं बल्कि बर्खास्त कर देना चाहिए क्योंकि कभी केसी अग्निहोत्री किसी भी व्यक्ति का फोन उठाना उचित नहीं समझता था।


जब हमारी विशेष चर्चा ग्रह विभाग के सचिव डॉ राजेश राजौरा से हुई तब हमारे द्वारा उनको अवगत कराया गया आपकारी विभाग के अधिकारी केसी अग्निहोत्री कभी किसी का फोन ही नहीं उठाते थे यदि कोई अवैध शराब की बिक्री हो रही है और सूचना देनी होती हैं तो कैसे दें।?

इस बात से गृह विभाग के सचिव संतुष्ट हो गए और उन्होंने तत्काल आबकारी विभाग के अधिकारी केसी अग्निहोत्री की रवानगी उसी दिन ग्वालियर के लिए कर दिया वैसे नियम के अनुसार उनको बर्खास्त करना चाहिए क्योंकि उनकी लापरवाही के चलते आज 18 लोगों की जान उज्जैन से गई है।


नगर निगम की भी लापरवाही।


उज्जैन में शराब कांड जो हुआ उसमें नगर निगम के जवाबदार अधिकारियों की भी बड़ी लापरवाही सामने आई है।
फिर उन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?


छोटे-मोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर सरकार ने राजनीति की अपनी रोटी देख ली है क्योंकि अगले महीने उप चुनाव होने वाले हैं उसी के चलते इस प्रकार की कार्रवाई कर अपने आप को बेगुनाह साबित कर दिया।


तौफीक के ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं?


नगरनिगम के अधिकारी सुबोध कुमार जैन का खासम खास माने जाने वाले करीबी बड़े-बड़े भ्रष्टाचार में लिप्त तौफीक खान की चर्चा इस समय बड़े स्तर पर शहर में आम जनता के बीच हो रही हैं।


ऐसे भ्रष्ट नगर निगम कर्मचारी पर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं?


जबकि लगातार अवैध तरीके से रसीद काटना शराब माफियाओं के साथ अपना संबंध बनाकर उन से अवैध वसूली करना ऐसे कई गोरखधंधा में तौफीक खान की मिलीभगत पाई गई।


उसके बाद भी अभी तक तो फिर खान के ऊपर जवाबदार अधिकारियों द्वारा जांच क्यों नहीं बिठाई गई?


शहर में और आम जनता के बीच चर्चा चल रही है तौफीक खान के ऊपर अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं करना एक प्रश्नवाचक चिन्ह है?


बेगुनाह पुलिस अधिकारियों पर गाज गिरना सरकार अपने आप में शंका के घेरे में।
आज हमारी टीम लगातार उज्जैन शहर और उज्जैन ग्रामीण में दौरा कर रही है आम जनता और से बात कर रही हैं और उनकी राय ले रही है।


90% जनता की आवाज उज्जैन तत्कालीन पुलिस कप्तान मनोज कुमार सिंह उज्जैन सिटी एडिशनल एसपी रूपेश दिवेदी और तत्कालीन सीएसपी रजनीश कश्यप पर जो गाज सरकार की गिरी पूरी तरह से गलत गिरी है क्योंकि यह तीनों अधिकारी बेगुनाह है इनकी कोई गलती नहीं है सरकार ने इस प्रकार की घिनौनी हरकत की है जो गलत है यह तीनों अधिकारी आम जनता की निगाहों में बेगुनाह है।


लेकिन सरकार ने अपनी रोटी सेकने के लिए इन तीनों अधिकारियों पर जो गलत तरीके से स्थानांतरण किया वह पूर्ण रूप से गलत है बेगुनाहों पर गाज गिरा दी और दोषियों को बचा लिया।


शहर में और ग्रामीण में यह भी चर्चा है गृह विभाग के सचिव डॉ राजेश राजौरा द्वारा जो जांच की गई उसमें अपने अपने लोगों को बचाने का कार्य भी किया गया।
ऐसा हम नहीं कह रहे।


यह आम जनता की आवाज । जिसे आप मुकर नहीं सकते।


आज उज्जैन शहर के छोटे पुलिसकर्मियों से हमारे समाचार के माध्यम से अपील करते हैं ऐसा कोई कार्य ना करें जिसमें आपके काले कारनामे के चलते वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गाज गिर जाए।


ऐसा कार्य करना चाहिए जिसके चलते पुलिस की एक अच्छी छवि बने और आप के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यों को लेकर प्रशंसा हो।


अभी और कुछ ऐसे पुलिसकर्मी जिनका शराब कांड वालों से संबंध है उनका फुटेज भी बहुत जल्दी हम हमारे समाचार के माध्यम से प्रकाशित करेंगे।


जो जहरीली शराब बनाने वाले शराब माफिया थे उनका संबंध और भी कई पुलिसकर्मियों के साथ थे उनका वीडियो फुटेज भी आ चुके हैं बहुत जल्दी हमारे समाचार के माध्यम से इस फुटेज को जल्दी से प्रकाशित करेंगे क्योंकि जिन लोगों के पास फुटेज है उनसे लेने का प्रयास हम कर रहे हैं हमें भरोसा है जल्दी फुटेज हमारे पास आ जाएंगे।

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