Domain Registration ID: DD9A736AA76EB45DBBFAF21E3264CDF2D-IN Editor - Neelam Dass, Add. - 105 Jawahar Marg, Ujjain M.P., India - Mob. N. - +91- 8770030644
अवैध काॅलोनाईजरों पर प्रशासनिक कार्रवाई से उठे सवाल

नागदा जं. निप्र। अपना घर बनाने का सपना संजोने वाले देशवासियों को काॅलोनाईजरों के नापाक मंसूबों से बचाने एवं उनके हितों की रक्षा हेतु रेरा जैसा महत्वपूर्ण कानून वर्ष 2016 में ही सरकार द्वारा बना दिया गया था।

 

बावजुद इसके चार वर्षो तक प्रशासन द्वारा इस महत्वपूर्ण कानून की अनदेखी की गई। सबकुछ अधिकारियों की आंखों के सामने घटता रहा लेकिन अधिकारी चार वर्षो से कुछ नहीं बोले तथा अचानक अवैध काॅलोनाईजरों पर कार्रवाई की मुहिम प्रारंभ कर दी गई है। जबकि चाहिए यह था कि कानून के लागू होते ही इसका पालन क्षेत्र में भी होना चाहिए था। रेरा जैसे महत्वपूर्ण कानून की अनदेखी का ही परिणाम है कि अवैध काॅलोनाईजर इतने फल-फूल गए।

वहीं प्रशासन पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं कि आखिर इतने समय तक चुप रहने के बाद आखिर किन लोगों के कहने पर प्रशासन ने इतना बडा कदम उठा लिया जिसके चलते अब क्षेत्र में अचल संपत्तियों के भाव आसमान पर पहुॅंचने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।


क्या है रेरा कानून

भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण मध्यप्रदेश (रेरा) एक ऐसी संस्था है जो अपना घर बसाने हेतु खून पसीने की कमाई को काॅलोनाईजरों को सौंपते है। ऐसे लोगों के हितों की रक्षा के लिए ही देश में रेरा कानून लागू किया गया है।

कानून के जानकारों के अनुसार जो भी काॅलोनी रेरा में पंजीकृत होती है उसके प्लाॅट, मकान धारकों को यदि काॅलोनाईजर परेशान करता है तो संबंधित की परेशानी का निराकरण तय समय सीमा उक्त कानून के तहत किया जाता है तथा प्राधिकरण में निर्णय होने के बाद इसकी अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ही की जा सकती है। ऐसे में गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के हितों की रक्षा के लिए उक्त कानून बेहद ही कारगर है।


हर 500 वर्ग मीटर से अधिक के प्रोजेक्ट के लिए रेरा आवश्यक

रेरा कानून की धारा 3(2) यह कहती है कि जहाॅं भी 500 वर्ग मीटर अर्थात 5382 स्कवेयर फीट से कम का प्रोजेक्ट बनाया गया है वहाॅं रेरा पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन इससे अधिक यदि कोई काॅलोनाईजर अपना प्रोजेक्ट बना कर प्लाॅट या भवन विक्रय करता है तो उसे अपना पंजीयन रेरा कानून के तहत करवाना ही होगा। ऐसा नहीं करने पर वह इस कानून के उल्लंघन का दोषी माना जाऐगा। साथ ही कानून में यह भी प्रावधान है कि कोई काॅलोनाईजर यदि 8 से अधिक प्लाॅट/भवनों को विक्रय, निर्माण का प्रोजेक्ट बनाता है तो उसे रेरा कानून का पालन आवश्यक होगा। इससे कम के लिए यह लागू नहंी किया जा सकता है।


वर्ष 2016 के पूर्व कम्पलीट हुए प्रोजेक्ट ही रेरा के दायरे से बाहर, शेष सभी पर पंजीयन आवश्यक
रेरा कानून वर्ष 2016 में लागू किया गया है। उक्त कानून के लागू होने के पूर्व जो भी प्रोजेक्ट अर्थात काॅलोनी के प्लाॅट, भवन विक्रय होकर यदि काॅलोनी संबंधित नगर पालिका अथवा नगर निगम को हस्तांतरित हो चुकी है तो उक्त काॅलोनी पर रेरा कानून लागू नहीं होता है। लेकिन इसके बाद बनने वाले सभी प्रोजेक्ट जो 500 वर्गमीटर के दायरे से अधिक हैं पर रेरा कानून लागू होता है तथा सभी काॅलोनाईजरों को इसके तहत अपना पंजीयन हर हाल में करना होता है। यदि रेरा के तहत कोई काॅलोनी पंजीकृत नहीं हेाती है तो उसे अवैध ही माना जावेगा।



प्रशासन की छूट ने ही बढाऐ अवैध काॅलोनाईजरों के हौसले


रेरा कानून वर्ष 2016 में लागू होने के बाद भी क्षेत्र में पदस्थ किसी भी अधिकारी ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं बीते कुछ सालों में इन अवैध काॅलोनाईजरों को प्रशासन एवं राजनेताओं का भी काफी सहयोग मिला।

जिसका परिणाम यह हुआ कि शहर के आसपास के क्षेत्रों में लगी कृषि भूमियों को समतल कर वहाॅं पर बेतहाशा आवासीय प्लाॅट काट दिए गए तथा यह दौर सबसे अधिक वर्ष 2016 के बाद से ही प्रारंभ हुआ। उस दौरान कई अधिकारी क्षेत्र में पदस्थ रहे लेकिन ततसमय कोई कार्रवाई नहीं की गई।

यकायत प्रशासन की कार्रवाई पर भी कई सवाल खडे हो रहे हैं। वहीं नागरिकों का तो यह भी कहना है कि कार्रवाई सिर्फ ढाक के तीन पात तक ही सिमित रहेगी तथा काॅलोनाईराजनों में दहशत पैदा कर कुछ लोग अपना मकसद हल कर फिर इसे ढंडे बस्ते में डाल देंगे।


शहर में मात्र एक काॅलोनी रेरा में पंजीकृत


शहर में एक मात्र टाउनशीप आरएम धारीवाॅल टाउनशीप ने ही रेरा में अपना पंजीयन करवाया है। आरएमडी का पंजीयन पी-एनजीडी-17-380 है तथा इसकी वैद्यता 8 सितम्बर 2017 से 31 दिसम्बर 2018 तक होने की जानकारी भी भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण मध्यप्रदेश (रेरा) के अधिकृत पोर्टल पर दर्ज है। इसके अलावा अन्य कोई नाम इसमें दर्ज नहीं है। ऐसे में इस बात साफ हो चुकी है कि शेष सभी प्लाॅटिंग साईट अवैध है। ऐसे में प्रशासन अब किन-किन पर कार्रवाई करता तथा करता भी है या नहीं ? यह तो आने वाला समय ही बताऐगा।

Leave a Reply

%d bloggers like this: