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अधीक आतिशबाजी से  शरीर पर होती है हानी

 

 

सुसनेर से युनूस खान लाला की रिपोर्ट चिरंतन न्यूज के लिए

 

 

दीपोत्सव की शुरुआत हो गई। मिठाई, नए कपड़ों के साथ पटाखों की धमक के बिना त्योहार फीका लगता है, लेकिन दीपावली पर चलने वाली ज्यादातर आतिशबाजी में नियमों की अनदेखी और हानिकारक रसायनों का उपयोग त्योहारी मस्ती को मुसीबत भी ला सकता है। इससे व्यक्ति की आंख, त्वचा, कान, हृदय, मस्तिष्क और श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि पटाखों में ऐसा हानिकारक तत्व, रसायन एवं गैस निकलती है जो स्वास्थ्य को नासाज कर वातावरण को भी लंबे समय तक प्रदूषित कर देती है।

 

किस रसायन का शरीर पर कैसा प्रभाव-एल्यूमीनियम-पटाखों में एल्यूमीनियम की अधिक मात्रा बेहत जहरीली साबित हो सकती है। जो किडनी पर सीधा असर डालती है। बुजुर्ग इसकी चपेट में आकर कमजोरी महसुस करते हैं। आंख, कान, लीवर सहित दिल पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

 

सल्फर डाइऑक्साइड-पटाखों में प्रयुक्त सल्फर जलने के बाद सल्फर डाइऑक्साइड गैस बनाता है। अधिक मात्रा जानलेवा हो सकती है। दमा के मरीज ज्यादा प्रभवित हो सकते हैं। गैस, पेट दर्द व एलर्जी की समस्या भी हो सकती है।

 

 

डॉक्टरों की मानें तो कान 85 डेसीबल तक की ध्वनि सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज वाले धमाके कान के पर्दे फाड़ सकते है। अलावा लगातार धमाकों की आवाज से श्रवण शक्ति कमजोर हो सकती है। खास बात यह है कि सरकार द्वारा भी बीते साल छह से अधिक पटाखों के परीक्षण के दौरान 90 डेसीबल से अधिक ध्वनि उत्पन करने वाला पाया गया था इसके वाबजूद इस प्रकार के पटाखे अब भी बेचे जा रहे हैं।

 

 

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