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शब्दाक्षर के राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कवियों ने पढी रचनाएं

गया । राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था शब्दाक्षर द्वारा हिन्दी पखवाड़ा 2022 के तहत अखिल भारतीय ‘शब्दाक्षर’ कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें भारत के 25 प्रदेशों से आमंत्रित शब्दाक्षर के राष्ट्रीय, प्रादेशिक तथा जिला पदाधिकारियों ने हिन्दी भाषा को समर्पित एक से बढ़कर एक अनुपम रचनाएँ पढ़ीं। शब्दाक्षर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह के दिग्दर्शन में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का संयोजन तथा संचालन शब्दाक्षर की राष्ट्रीय प्रवक्ता-सह-प्रसारण प्रभारी प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष श्यामल मजूमदार ने की।

राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष ज्योति नारायण द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। प. बंगाल से कवि रवि प्रताप सिंह की “देवनागरी देवों की लिपि, देवभूमि है धाम, शब्दाक्षर की प्रखर लेखनी, करती इसे प्रणाम”, अंजू छारिया की “सहज, सरल, मनभावनी, कहती मन की बात”, विश्वजीत शर्मा सागर की घनाक्षरी “ऐसी साँझ आयी, मन में उमंग छायी, काव्य की लहर उठी, आज जन-जन में”, कृष्ण कुमार दूबे की “हमारी आत्मा भी है, हमारी जान है हिन्दी” एवं अनामिका सिंह की “हिंदी पूर्ण सुधा कलश, हिन्दी सबका मान”; उत्तराखंड से कवि महावीर सिंह वीर की “हिन्दी को मान देना कर्तव्य है हमारा, हिन्दी पे हम न कोई अहसान कर रहे हैं” एवं हिमांशु पाठक की “गंगा सी अविरल बहती है भावों के रूप में यह हिन्दी”; उत्तर प्रदेश से श्यामल मजूमदार की, “मैं हिन्दी का सेवक, मैं हूँ हिन्दी का दीवाना रे”, शशिकांत मिश्र की “हिन्दी भाषा की उन्नति में निहित राष्ट्र का गौरव है” एवं रचना मिश्रा की “सहज, सरल, समृद्ध है, सुगम हमारी हिन्दी”; कर्नाटक से सुनीता सैनी गुड्डी की “मरने ना देंगे हिंदी को, हम इसके रखवाले हैं”, तमिलनाडु से केवल कोठारी की “आज फिर दीवार घर की टूट कर कुछ कह रही है”, बिहार के जहानाबाद से सावित्री सुमन की “हिन्दी मन की भाषा है” एवं पिंकी मिश्रा की “अंतस की पीड़ा हरने का हुनर रखती है हिन्दी”; गोवा से वंदना चौधरी की “हिन्दी बस भाषा नहीं, मन के हैं उद्गार”, दिल्ली से कवि प्रवीण राही की “बातों की कर रहा था वो बैटिंग बड़े गुरूर से, मैंने भी उसपर शब्दों का छक्का लगा दिया” एवं डॉ. स्मृति कुलश्रेष्ठ के मन मोह लेने वाले मधुर गीत “करो अपनी भाषा से प्यार” ने खूब तालियाँ बटोरीं। बिहार के गया की सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने प्रथम काव्य-कृति ‘कविता बसंत बन जाती है’ में संग्रहित प्रथम कविता “है मेरा तुमसे वादा” का सुमधुर पाठ कर सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर डाला। उनके इस भाव भरे गीत में प्रेयसी कविता अपने व्यथित प्रेमी कवि से कहती है, “जब दिखने लगे परायापन, तुमको स्वजनों में, अपनों में, मैं लेकर वो मुस्कान भरे पल, आ जाऊँगी सपनों में। है मेरा तुमसे वादा, स्नेह- सिक्त कर डालूंगी जीवन, फिर नहीं डँसेगा पतझड़, विहँसेगा वसंत, पुलकेगा मन।” कोलकाता से जुड़े सुबोध कुमार मिश्र तथा कर्नाटक के विजयेन्द्र सैनी की रचनाओं की भी जमकर तारीफें हुईं।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी निशांत सिंह गुलशन ने समस्त शब्दाक्षर परिवार एवं दर्शकों के प्रति कृतज्ञता जतायी।

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