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केक काटकर कवियों के बीच मनाया अपना जन्मदिन

 गया। गया जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द का काव्य संग्रह 'मान कभी ना हार' उनके 75 वें जन्मदिन पर सम्मेलन के डॉ मंजु करण सभागार में लोकार्पण किया गया। सम्मेलन के उप सभापति अरुण हरलीवाल की अध्यक्षता में लोकार्पण समारोह को संचालित करते हुए महामंत्री सुमन्त ने हंस के सम्पादक संजय सहाय का लिखित संदेश पढ़कर सुनाया। कवि सुरेन्द्र ने लोकार्पित पुस्तक से कुछ प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक प्रो कृष्णनंदन यादव ने कहा कि सुरेन्द्र जी का व्यक्तित्व और कवि कर्म जमीनी तौर पर संघर्षशील है। उनकी कविताएं वाकई उर्जा भरने वाली हैं। वरिष्ठ कवि गीतकार डॉ रामकृष्ण ने कहा कि सुरेन्द्र जी का जीवन चिंतन और लेखन बिल्कुल कसा हुआ है। लोकार्पित पुस्तक की कविताएं  समूहबोध से सम्पन्न हैं। शिक्षाविद कमला प्रसाद सिंह ने कवि सुरेन्द्र की निर्भीकता और जनवादी तेवर की सराहना की। प्रलेस के जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने कहा कि ये कवितायें सच के दस्तावेज हैं। दरअसल संघर्षों के बीच से उभरी कविता ही सच बोलती है। सुरेन्द्र जी हार को परे धकेलने वाले कवि हैं। साहित्य महापरिषद के संस्थापक महासचिव राजीव रंजन ने कहा कि जनकवि वही होता है, जिसकी रचनाएं उसकी विचारधारा और व्यक्तित्व के संगत होती हैं। कवि सुरेन्द्र इस कसौटी पर खरे हैं।वरिष्ठ अधिवक्ता और एकता मंच के अध्यक्ष मसूद मंजर ने कहा कि सुरेन्द्र जी की कविताएँ उनकी विचारधारा से समृद्ध हुई हैं। उर्दू और हिन्दी के वरिष्ठ कवि एम ए फातमी ने कवि सुरेन्द्र के सामाजिक सरोकारों और उनकी कविताओं के ओजस्वी अंदाज को रेखांकित किया। कवि कन्हैया लाल मेहरवार , डॉ कृष्ण कुमार सिंह एवं कुमार कांत के अतिरिक्त कृष्णदेव यादव, सच्चिदानन्द प्रसाद, उपेन्द्र सिंह, अंजू कुमारी, रामाश्रय सिंह आदि ने भी सुरेन्द्र सिंह सुरेन्द्र को जन्मदिन की बधाई दी एवं उनकी कविता पुस्तक का स्वागत किया।
               समारोह में डॉ एहसान ताबिस, कपिलदेव सिन्हा, लालजी प्रसाद, सीताराम शर्मा, एजाज मानपुरी, स्नेहलता सिंह, मो यहिया, अनामिका गुप्ता,  परवेज़ आलम, उदय सिंह, विजय सिंह, संजीत कुमार, खालिक हुसैन परदेसी, मुद्रिका सिंह, शैलेश ज्ञानी, कुमार आकाश आदि साहित्यकार अथवा साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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