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जयंती पर आचार्य शिवपूजन सहाय को दी गई श्रद्धांजलि

गया। साहित्य महापरिषद गया के तत्वावधान में आचार्य शिवपूजन सहाय की जयंती चंपा कुंज, मानपुर में डॉ राम सिंहासन सिंह की अध्यक्षता में मनाई गई। सर्वप्रथम उपस्थित साहित्यकारों ने आचार्य शिवपूजन सहाय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ राम सिंहासन सिंह ने कहा के हिंदी साहित्य के मौन साधक थे आचार्य शिवपूजन सहाय। उन्होंने राष्ट्र, राष्ट्रभाषा तथा हिंदी पत्रकारिता की सेवा में अपना समग्र जीवन समर्पित कर दिया था। उनका जन्म आज ही के दिन 9 अगस्त 1893 को ग्राम उन वास जिला बक्सर में हुआ था। आचार्य शिवपूजन सहाय कथाकार के व्यंग्यकार थे,भाषा शास्त्री थे भाषा परिमार्जन थे तथा उच्च कोटि के आलोचक भी थे । ‘देहाती दुनिया’ उनका सामाजिक और ग्राम में चेतना पर आधारित उपन्यास है।
उन्होंने मारवाड़ी सुधार , मतवाला , माधुरी, गंगा, जागरण ,तरंग ,बालक ,हिमालय, गोलमाल आदि पत्र-पत्रिकाओं का सफल संपादन किया था। पूर्व प्रधानाचार्य डॉ कृष्ण देव मिश्र ने कहा विवेक विहार के मूर्धन्य साहित्यकारों में एक थे। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन तथा बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की स्थापना में उनका अमूल्य योगदान रहा है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ बाल कृष्ण प्रसाद वर्मा ने कहा कि उन्हें साहित्य सेवा सम्मान में भारत सरकार पद्मभूषण उपाधि से अलंकृत किया था। मंच संचालन करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि उन्होंने राजेंद्र कॉलेज छपरा में प्राध्यापक के रूप में अपनी सेवा दी थी। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद द्वारा उन्हें वयोवृद्ध साहित्यिक सम्मान भी प्रदान किया गया था ।
इसके अतिरिक्त राजेंद्र सिंह अरुण कुमार डॉ अभिलाषा कुमारी, सुमित्रा कुमारी,सुनीता कुमारी, रामनाथ सिंह आदि ने भी सभा को संबोधित किया। अंत में पंकज कुमार के धन्यवाद के साथ सभा सभा समाप्त की गई।

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