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5 दिनों तक मंदिर में बहेगी शास्त्रीय संगीत की रसधार

गया।कोरोना त्रासदी के 2 वर्षों के बाद विष्णुपद मंदिर में धूमधाम से उत्सवी माहौल में झूलनोत्सव की शुरुआत की गई। मौका था सावन एकादशी से पूर्णिमा तक चलने वाले पांच दिवसीय झूलनोत्सव का। विष्णुपद मंदिर, इस्कॉन मंदिर, गोडी़या मठ मंदिर, गोल पत्थर हनुमान मंदिर, श्री कृष्ण द्वारिका मंदिर, देवघाट स्थित श्री रामानुजाचार्य मठ, सहित कई अन्य ठाकुरबाड़ी में सोमवार की देर शाम वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पांच दिवसीय झूलनोत्सव शुरू हो गया, जो सावन पूर्णिमा तक चलता रहेगा।श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति चौदह सईया गयापाल के तत्वधान में विष्णुपद मंदिर प्रांगण में 51 किलो चांदी की पालकी व झूले पर सोने के विष्णु चरण को साज सज्जा कर विराजमान कराया गया। फूल माला और तुलसी पत्रों से चौकी पर श्री हरि के चरण को आसीन कर झूले को आकर्षक ढंग से सजाया संवारा गया।

इसके बाद गयापाल ब्राह्मणों ने विष्णु चरण पर फल, मिष्ठान, मलयागिरी चंदन,तुलसी पत्र, सूखे मेवे अर्पण के साथ विशेष पूजा अर्चना कर मंगल आरती की।पांच दिनों तक विष्णुपद का पूरा प्रांगण शास्त्रीय संगीत की लहरियों से गुंजायमान रहेगा।रात्रि बेला में स्थानीय एवं दूसरे प्रदेशों के शास्त्रीय और उप शास्त्रीय गायन के संगीतकार अपनी प्रस्तुति देंगे। मंगलवार को श्री विष्णुपद संगीत विद्यालय के शिष्यों द्वारा तबला वादन की प्रस्तुति एवं गया घराने के संगीतकार पं महेश लाल हल द्वारा शास्त्रीय और उप शास्त्रीय गायन प्रस्तुत करेंगे।

बुधवार को भोपाल की सुश्री अनुराधा के द्वारा कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। गुरुवार को कोलकाता की मनाली बोस द्वारा शास्त्रीय गायन, जिसमें तबला पर कोलकाता के इमोन सरकार,वाराणसी के सारंगी वादक विनायक मिश्रा हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्रा रहेंगे।अंतिम दिन शुक्रवार को गया घराने के चर्चित संगीतकार पंडित राजेंद्र लाल सीजीयम द्वारा का शास्त्रीय गायन होगा। वृंदावन से पधारे कथावाचक परम पूज्य प्रीति रामानुजा जी द्वारा श्रद्धालुओं को अमृत पान कराया गया। सावन मास के आखिरी पांच दिनों तक आयोजित होने वाले झूलनोत्सव में कोरोना के कारण लगे पाबंदी के दो वर्षों बाद श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

झूलनौत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कतार में होकर मंदिर में प्रवेश कराया जा रहा है। भगवान के सुगम दर्शन के लिए मंदिर की ओर से सुरक्षा के तगड़े प्रबंध किए गए हैं। मंदिर के अंदर मोबाइल ले जाने पर लगी पाबंदी से इस बार श्रद्धालु झूलन की तस्वीर नहीं ले पाएंगे। इस अवसर पर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने बताया कि विष्णुपद में भगवान विष्णु के चरण को सोने की पालकी पर रखकर झूला झुलाने की परंपरा सदियों से चलती आ रही है। भगवान श्री कृष्ण के अवतार के रूप में अवतरित भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना होती है।

इसलिए यहां विष्णु भगवान को झूले पर झूलाया जाता है। इस अवसर पर सचिव गजाधर लाल पाठक, सदस्य महेश लाल गुप्त, मुन्नालाल गुर्दा, अमरनाथ धोकड़ी,मणिलाल बारीक सहित बड़ी संख्या में पंडा समाज के लोग उपस्थित थे।

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