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इंटैक का दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

मंगला गौरी एवं अक्षयवट की धार्मिक महत्ता से हुए रूबरू

गया।डीएवी पब्लिक स्कूल कैंट एरिया के सेमिनार हॉल में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज इंटैक (गया चैप्टर) की ओर से दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला के दूसरे दिन धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष चर्चा की गई। कार्यशाला में इंटैक की प्रधान निदेशक पूर्णिमा दत्त, डीएवी पब्लिक स्कूल की प्राचार्या अंजली और सहायक अभिषेक दास को श्रीविष्णु चरण भेंट कर सारस्वत पूर्वक सम्मानित किया गया ।

इसके पूर्व कार्यशाला में हिस्सा लिये विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों को इंंटैक की ओर से विरासत यात्रा के तहत रूक्मिणी तालाब,अक्षय वट, वृद्धपरपितामहेश्वर और मातृ तीर्थ मंगलागौरी का परिभ्रमण कराया गया। परिभ्रमण कार्यक्रम में इतिहासकार और पुरातत्वविद डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि ने उक्त सभी धार्मिक स्थलों एवं अक्षय वट के ऐतिहासिक,धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी बारीकी से दिया। इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों को पांच समूह में विभक्त कर डुंगेश्वरी पर्वत, महाबोधि महाविहार, मानपुर पावरलूम,महापर्व छठ के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से दर्शाया।बिहार के लोक गायन से जुड़े शानदार कार्यक्रम का स्वागत किया गया।

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इन्टैक के गुणगान के साथ दिल्ली से आए इंटैक चैप्टर के प्रधान निदेशक पूर्णिमा दत्त ने कहा कि विरासत क्ल्ब शिक्षा का एक साधन है यही कारण इसका महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित समस्त शिक्षकों से अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच भारत की सांस्कृतिक विरासत और उनके धरोहरों की विस्तृत जानकारी से अवगत कराने को कहा ताकि उन्हें अपने देश से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को जानने का अवसर प्राप्त हो सके। इसके लिए विद्यालयों में विरासत के संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गया शहर अपने आप में ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासतो से परिपूर्ण शहर है।

गया में कई ऐसे सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे सहेजने की आवश्यकता है।इसे इस दुनिया तक पहुंचाये। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि जिज्ञासा के जरिए अपनी देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बच्चों के बीच बताएं।कार्यक्रम का संचालन मगध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के डॉ सचिन मंदिलवार ने किया।इसमें भाग लेने वाले विद्वानों और शिक्षकों में राजेश कुमार, अशोक कुमार सिन्हा, धनंजय सिंह, सुमन सिन्हा,सिमरन सिंह,सबिहा,स्वर्ण सिन्हा, जयंती कुमारी,धर्मेंद्र कुमार,पियुष कुमार,सरोज कुमार,जय प्रकाश,नवलेश राय,अंजना कुमारी,मनोज कुमार,कंचन निषाद, आदर्श राज,रिना कुमारी,दीपक महतो, अंशु रानी,रूपम बाला, अरविन्द कुमार, अंजना कुमारी, सुष्मिता बोस,मितु कुमारी,अमित वर्मा, माधुरी सिन्हा,हरि भूषण, माला अम्बष्टा, श्वेता राज, अश्वनी कुमार आदि प्रमुख हैं।

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