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महाकाल की नगरी सबसे अधिक प्रदूषित

उज्जैन। जिस उज्जैन की पहचान देश विदेशों में धार्मिक व महाकाल की नगरी के रूप में बनी हुई है वहां की आबोहवा मध्यप्रदेश के अन्य शहरों की अपेक्षा सबसे अधिक प्रदूषित है। इसे लेकर प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिकों के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियो ंने भी चिंता जाहिर की है।


शहर में ओजोन गैस व धूल के कणों का स्तर बढ़ा हुआ

इससे वायु गुणवत्ता सूचकांक 178 तक पहुंच रहा है। उज्जैन में ओजोन गैस का स्तर 60 व धूल के कणों का स्तर 100 तक होना चाहिए, जो बढ़कर क्रमशः 217 व 130 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच रहा है। इसकी वजह वाहनों से निकलने वाला धुआं, खराब सड़कें व खुले में चल रहे निर्माण कार्य हैं। वायु प्रदूषण से श्वांस, फेफड़े, एलर्जी संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं।

बीमार बुजुर्ग व बच्चों को अधिक परेशानी

 दरअसल, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के उज्जैन, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर समेत 15 शहरों में स्टेशन हैं, जो 24 घंटे हवा में प्रदूषण की स्थिति को रिकार्ड करते हैं। इन्हीं स्टेशनों के आंकड़ों से पता चला है कि बीते दिनों ही  उज्जैन का सूचकांक सबसे अधिक 178 अंक तक पहुंच गया था। उज्जैन के बढ़े हुए एक्यूआइ के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

मापक यंत्र देवास रोड भरतपुरी स्थित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आगर रोड स्थित नगर निगम मुख्यालय, मक्सी रोड स्थित जिला औद्योगिक केंद्र और महाकाल मंदिर में लगे हुए हैं। लाकडाउन के बाद बढ़ी वाहनों की आवाजाही इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। ट्रेनें बंद होने से भी सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ी है, इसलिए भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) बढ़ा है। साथ ही कुछ स्थानों पर सीवरेज प्रोजेक्ट की खोदाई से धूल के कणों की संख्या बढ़ी है। ये भी बढ़े हुए प्रदूषण का कारण माना जा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वे एक्यूआई के बढ़े हुए आंकड़ों की पड़ताल कर रहे हैं।

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