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इमरान राजा दैनिक चिरंतन शाजापुर ।

शाजापुर। प्रशासन की उदासीनता के कारण इटर्नल स्कूल संचालक द्वारा पालकों पर जबरन पूरे वर्ष की फीस वसूली को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। वहीं जिन बच्चों के पालकों ने फीस जमा नही की गई है उन्हे ऑनलाइन वाट्सअप ग्रुप से भी स्कूल प्रबंधन द्वारा बाहर निकाल दिया गया है। स्कूल प्रबंधन की इसी मनमानी को लेकर अभिभावक सोमवार को कलेक्टर दिनेश जैन के पास पहुंचे और इटर्नल स्कूल प्रबंधन की शिकायत कर कार्रवाई किए जाने की मांग की।

इटर्नल स्कूल प्रबंधन पर अभिभावकों ने लगाया आरोप स्कूल द्वारा बिना कोई सूचना दिए एवं बिना पालकों की सहमती के ऑनलाईन शिक्षा प्रारंभ कर दी गई,

सौंपे गए ज्ञापन में अभिभावकों ने बताया कि वैश्विक महामारी कोविड 19 के कारण फरवरी माह से सभी स्कूल बंद हैं, लेकिन इसके बाद भी इटर्नल स्कूल प्रबंधन द्वारा पूरे वर्ष का शुल्क 3 किश्तों में मांगा जा रहा है। वहीं ज्ञापन में बताया कि राज्य शिक्षा केन्द्र के पत्र क्रमांक क/नि.स./आयुक्त/म.प्र.रा.शै.अ.प्र.प./2020/25, दिनांक 18जून 2020 के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक की सभी कक्षाओं पर ऑनलाईन शिक्षा पर प्रतिबंध था, परंतु उक्त स्कूल द्वारा बिना कोई सूचना दिए एवं बिना पालकों की सहमती के ऑनलाईन शिक्षा प्रारंभ कर दी गई, और प्रबंधन ने यह भी नही देखा कि सबंधित बच्चों के पास ऑनलाईन शिक्षा के लिए मोबाईल, कम्पयूटर, लैपटाप, इंटरनेट कनेक्शन आदि की सुविधा है या नही। इसीके साथ इटर्नल स्कूल प्रबंधन द्वारा ट्यूशन फीस के नाम पर तीन किश्तों में पूरे साल की फीस मांगी जा रही है। स्कूल द्वारा फीस के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा है फीस जमा नही करने पर बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार से वंचित कर दिया गया है और यही कारण है कि बिना कोई सूचना दिए ऑनलाईन ग्रुप से बच्चों को बाहर कर दिया गया है जोकि नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 के नियम 18(3) का उल्लंघन है।

स्कूल प्रबंधन द्वारा इस वर्ष भी कोर्स बदल दिया गया है

अभिभावकों ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में सभी लोग आर्थिक समस्या का सामना कर रहे हैं, किन्तु ऐसे समय में भी स्कूल प्रबंधन द्वारा इस वर्ष भी कोर्स बदल दिया गया है जिससे पालकों को और अधिक आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बिना कोई उचित कारण के कोर्स परिवर्तित करना भी शिक्षा नीति का उल्लंघन है। ज्ञापन में मांग की गई कि जबरिया फीस वसूली पर रोक लगाई जाए और नियमानुसार स्कूल प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

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