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मेघनगर।निमिष नाहटा।

मेघनगर अणु स्वाध्याय भवन पर विराजित पू. पुण्यशीलाजी म.सा.आदि ठाणा के सानिध्य में यहां विविध धर्म आराधनाऐं चल रही है।इसी क्रम में दीर्घ तप आराधना करने वाले श्रीमती स्नेहलता बहन हँसमुखलाल वागरेचा ने रविवार को इनकानवे उपवास का पारना अपने निवास पर किया। उल्लेखनीय है कि स्नेहलताबहन पूर्व में कई बार दीर्घ तप कर चुकी है।बुद्धपुत्र प्रवर्तक पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के 2017 के वर्षावास में आपने 111 उपवास की उग्र तपस्या की थी।इस अवसर पर लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में यह कीर्तिमान आपके नाम दर्ज किया गया था।वर्तमान में थांदला विराजित श्रमण संघ के प्रवर्तक पूज्य गुरु भगवंत श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के मुखारविंद से मंगलवार को आपने इनकानवें उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए थे।

गर्म जल के आधार पर ही किया जाता है तप

जैन धर्म में सिर्फ गर्म जल के आधार पर तप किया जाता है।इसमें भी सूर्यास्त के पश्चात से लेकर सूर्योदय होने के बाद 48 मिनट तक जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है। इतनी दीर्घ तपाराधना सिर्फ गर्म जल के आधार पर ही करना बहुत कठिन है।लगातार तीन माह तक तप करने वाले साधक विरले ही होते हैं।

इसी क्रम में मेघनगर श्रीसंघ में शशिबहन नांदेचा 23, चांदमल चोरडिया 19 और कश्मीरा डोशी ने 18 ने उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
इस उपलक्ष्य में हंसमुखलाल मिश्रीमल वागरेचा परिवार ने प्रभावना का लाभ लिया।दोपहर में धार्मिक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया जिसमें स्वल्पाहार एवं प्रभावना का लाभ सुभाषचंद्र भेरूलाल झामर परिवार ने लिया।

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