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सुसनेर से यूनुस खान लाला की रिपोर्ट चिरंतन न्यूज़ के लिए

सर्वजनिक वितरण प्रणाली के राशन वितरण मामले में जिम्मेदारों की भूमिका भी पूरी तरह से सवालों के घेरे में है । इसमें करोड़ों की गड़बड़ी की आशंका है इस पूरे मामले में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन को 1 अप्रैल 2020 से 31 अगस्त 2020 के बीच गेहूं चावल शक्कर  नमक दाल मिला है और किस संस्था को कितना आवंटन किया गया है तथा उस संस्था के पास निर्धारित अवधि में कितना आवंटन पहुंचा या नहीं पहुंचा  । केवल इन्हीं बातों की गंभीरता से छानबीन हो जाए तो मामले की सारी सच्चाई सामने आ सकती है । जिस तरह का राशन घोटाला इंदौर के महू में सामने आया है उसी तरह का घोटाला सुसनेर क्षेत्र में भी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है राशन परिवहन करता वितरण करने वाली दुकानों के सेल्समैन और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से इस खेल को अंजाम दिया जा रहा है ।दुकानों के सेल्समैनों को नाम मात्र की तनख्वाह मिलती है । मगर  लखपति व्यक्तियों की गिनती में शामिल है सुसनेर क्षेत्र में 48 दुकानों के जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन बढ़ता है और इन दुकानों में प्रतिमाह औसतन 6 से 7000 क्विंटल गेहूं का वितरण होता है। जो गेहूं एक रुपए किलो की दर से उपभोक्ता को दिया जाना होता है वहीं गेहूं संबंधित दुकानों के सेल्समैन की मिलीभगत से बाजार में 15 से ₹18 किलो की दर से बेच दिया जाता है ।पिछले 3 सालों में क्षेत्र में जिन लोगों ने इस राशन का प्रयोग किया है वे लोग आलाखों की गिनती में शामिल है जिस दुकान के अधिकारियों की सेटिंग हो जाती है उस दुकान पर आवंटन की मात्रा बढ़ जाती है और इस बढ़ी हुई मात्रा को बाजार में भेज दिया जाता है । इस खेल में शामिल खाद्य विभाग के कई जिम्मेदार अधिकारी सालों से आगर जिले में ही जमे हुए हैं । 
आवंटन वितरण और शेष बचा स्टाक की जांच हो सकती है सारे राज
 इस पूरे खेल में एक अप्रैल 2020 से अभी तक वितरण करने वाली दुकानों को कितना आवंटन किया गया है दुकान के लिए कितना शासन से प्राप्त हुआ है। तथा किस दुकान पर कितना भेजा गया है तथा उन दुकानदारों के पास प्रति माह में कितना राशन स्टॉक रहा है । साथ ही जिलों की दुकानों में से किस दुकान का आवंटन बढ़ाया गया है और किसका घटाया गया साथ ही किस वेयरहाउस में तथा शासकीय गोदामों में कितना गेहूं रखा गया था और आज की स्थिति में उस जगह पर कितना गेहूं शेष बचा है ।इन बिंदुओं की गंभीरता पूर्वक जांच यदि जिम्मेदार कर ले तो मामले की सारी सच्चाई सामने आ सकती है । साथ ही जिन जिम्मेदारों पर इस राशन के वितरण की देखरेख की जवाबदारी है उन्हें 1 अप्रैल से अभी तक किस राशन दुकान का निरीक्षण किया तथा किस गांव के उपभोक्ताओं को फ्री राशन मिलने की जानकारी दी । इसकी जांच हो तथा जिम्मेदारों की निरीक्षण पंजी कहां है और उसमें किन बातों का उल्लेख है तथा निरीक्षण के बाद कब-कब किस अधिकारी ने अपना प्रतिवेदन अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है इसकी भी जांच की जाना चाहिए।
 इनका कहना 
सुसनेर क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से घटिया चावल वितरण करने तथा इसमें गड़बड़ियां होने के मामले में जांच की जा रही है । सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर उनसे प्रतिवेदन मांगा गया है । आवंटन वितरण और शेष बचे स्टाक की जांच भी करवा ली जाएगी । मामले में जांच के बाद जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध उचित कार्यवाही की जाएगी ।
 वी एम शुक्ला जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी आगर मालवा

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