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छठी संध्या की शुरूआत डाॅक्टर खिलवड़कर के संबोधन से डिजिटल प्लेटफार्म पर हुई

उज्जैन। प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संजा लोकोत्सव की छठी संध्या 12 सितंबर का शुभारंभ दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक डॉक्टर दीपक खिलवड़कर के सम्बोधन से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हुआ।

 जानकारी देते हुए कार्यक्रम समन्वयक कल्याणी सिंह जादौन ने बताया कि कार्यक्रम का आरंभ अफ्रीकी मूल के गुजरात में रहने वाले जनजातीय कलाकारों द्वारा  सिद्धिधमाल लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया इस नृत्य में कलाकारों द्वारा वन्य प्राणियों जैसे हाव-भाव  उनके जैसी चाल चलकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया जाता है जंगलों में तथा पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर यह लोग शेरों को पालने वाली जनजातीय समूह के लोग हैं यह कलाकार नृत्य करते हुए हवा में नारियल उछालते हैं और फिर उसे सिर से फोड़ते हैं ।


द्वितीय प्रस्तुति के रूप में विगत वर्षों में संजा लोकोत्सव के अंतर्गत भिन्न-भिन्न मंचों पर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोक कलाओं के क्षेत्र में कार्य कर रहे उत्कृष्ट कलाकारों को लोककला सम्मान से सम्मानित किया गया। इन कलाकारों पर आधारित एक वृत्त चित्र प्रस्तुत किया गया ।

इनमें प्रमुख रूप से स्व.श्री हीरालाल जौहरी (लोकनृत्य) ,श्री आनंदी बाबू सांखला (माचगुरु) ,श्री नरेंद्र सिंह कुशवाह (नगाड़ा वादन, श्री छगनलाल शिवालिया (लोक संगीत),श्री राधाकृष्ण वाडिया (काष्ठ कला), श्री चंदन यादव (मांडना एवं लोकचित्रावन)गयुर खान (मंच सज्जा), श्री मनोज जैन (वेशभूषा), श्री के.बी. पंड्या (मंच सज्जा ),श्री बाबूलाल देवड़ा (माच कलाकार ),श्रीमती विष्णुकांता गहलोत (जीजी) (संजा- मांडना विशेषज्ञ) श्री मोहन माली (भित्ति चित्र)के साथ ही देश के विभिन्न अंचलों के लगभग 250 लोक कलाकारों को सम्मानित किया जा चुका है ।

तृतीय प्रस्तुति के रूप में  मालवा ही नहीं वरन मध्य प्रदेश गौरवशाली लोकपरंपरा माच लोकनाट्य की प्रस्तुति दिखाई गई वर्तमान में माच परंपरा विलुप्तिकरण की ओर जा रही है प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था इसे संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष मार्च की प्रस्तुति से ही लोकोत्सव का आरंभ करती है ।गत वर्ष की इस प्रस्तुति में मार्च गुरु श्री सिद्धेश्वर सेन को समर्पित कर राजा भर्तहरी कथा पर आधारित माच का मंचन किया गया ।इस प्रस्तुति के संयोजक श्री सुधीर सांखला एवं राजा भर्तहरि की मुख्य भूमिका में श्री बाबूलाल देवड़ा थे कार्यक्रम की अंतिम कड़ी के रूप में डॉ. पल्लवी किशन द्वारा संजा: मर्यादाओं और संस्कारों की विद्यास्थली विषय पर लेक्चर डेमोंस्ट्रेशन देते हुए नवमी तिथि से अमावस्या तक बनने वाली विभिन्न आकृतियों औरउनका महत्व पर जानकारी दी।  कार्यक्रम का संचालन संस्था सचिव कुमार किशन द्वारा किया गया ।

आज अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन


प्रतिकल्पा सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संजा लोकोत्सव के अंतर्गत” लोक एवं जनजातीय साहित्य और संस्कृति: सार्वभौमिक जीवन मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में “विषय पर वेब संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा इस संगोष्ठी में  मुख्य अतिथि श्री सुरेश चंद्र शुक्ला शरद आलोक (प्रवासी साहित्यकार एवं अनुवादक) आस्लो नार्वे, अध्यक्ष प्रो. नवीन चंद्र लोहनी (पूर्व आईसीसीआर चेयर /आचार्य सिसु ,चीन अधिष्ठाता कला एवं  विभागाध्यक्ष हिंदी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय,( मेरठ ), प्रमुख वक्ता प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा, हिंदी विभागाध्यक्ष कुलानुशासक विक्रम विश्वविद्यालय ,(उज्जैन), विशिष्ट अतिथि डॉ अलका धनपत, वरिष्ठ प्राध्यापक महात्मा गांधी संस्थान मोका ,(मॉरीशस) विशिष्ट अतिथि डॉक्टर हीरा मीणा, जनजातीय संस्कृति अध्येता,( नई दिल्ली) शिरकत करेंगे वरिष्ठ साहित्यकार डॉक्टर शिव चौरसिया, संस्था अध्यक्ष श्री गुलाबसिंह यादव ,निदेशक डॉ पल्लवी किशन, सचिव कुमार किशन एवं संस्था के अन्य पदाधिकारियों ने सभ संस्कृति प्रेमियों से इस संगोष्ठी में भाग लेने का आह्वान किया है  ।

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