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सुसनेर से युनूस खान लाला की रिपोर्ट चिरंतन न्युज के लिए
प्र्  सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जिले भर में राशन वितरण करने वाली दुकानों से गरीबों और जरूरतमंदों को खराब क्वालिटी का चावल वितरित किया जा रहा था । अब इस बात की पुष्टि जिन गोदामों में चावल रखा है वहां से लिए गए सैंपलों  की जांच रिपोर्ट के बाद भारतीय खाद्य निगम ने कर दी है । भारतीय खाद्य निगम ने नागरिक आपूर्ति निगम के नलखेड़ा के 4 और आगर के तीन तथा सुसनेर के 3 स्टाक के जिनमें करीब 10 से 15 हजार क्विंटल चावल के वितरण पर रोक के आदेश जारी किए हैं और रोक के इस आदेश की पुष्टि नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक के एल परमार ने की है। अब सवाल यह है कि इस सारे गड़बड़ झाले के लिए आखिर जिम्मेदार कौन जिन लोगों पर चावल की गुणवत्ता की जांच करके उसे लेने की जिम्मेदारी थी उन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया । सूत्रों की माने तो पूरे आगर जिले में 50000 क्विंटल से अधिक घटिया क्वालिटी का चावल का वितरण हो चुका है और इसमें से 70 फ़ीसदी चावल सीधे व्यापारियों के पास पहुंचा है । शासन के निर्देश थे कि इस चावल को या तो मुफ्त बांटा जाए या फिर एक रुपए किलो की दर से बांटा जाए इसमें भी वितरण करने वाली दुकानों के सेल्समैन ने जमकर कमाई की है । 
जांच के लिए नहीं पहुंचे अधिकारी
 इस पूरे गड़बड़ झाले से जुड़े अधिकारियों के मन में भी खुलासे के बाद कहीं ना कहीं डर सा बैठ गया है ।जिला कलेक्टर ने वितरण होने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता की जांच के लिए 3 सदस्य का गठन तो कर दिया किंतु दल में शामिल अधिकारी जांच के लिए शनिवार को सुसनेर नहीं पहुंचे ।अधिकारियों का गोदामों पर इंतजार होता रहा किंतु इंतजार के बाद भी अब अधिकारी नहीं पहुंचे तो गोदामों से दुकानों तक माल की सप्लाई भी नहीं हो पाई।  वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के जिम्मेदारों ने रोकने का प्रयास किया था । लेकिन नागरिक आपूर्ति निगम ने नहीं सुनी इस पूरे मामले में चौंकाने वाली बात यह सामने आई आ रही है कि जब घटिया चावल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के गोदामों तक पहुंच रहा था तभी कारपोरेशन के जिम्मेदारों ने इस बात से नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों को अवगत भी कराया था । किंतु गड़बड़ झाले में लिप्त अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया । क्योंकि वेयरहाउसिंग कारपोरेशन की जिम्मेदारी तो अपने गोदामों में जमा माल की देखरेख तक ही सीमित होती है। इसलिए भी इस पूरे मामले में नागरिक आपूर्ति निगम और खाद्य विभाग के जिम्मेदारों की भूमिका पूरी तरह से सवालों के घेरे में होकर संदिग्ध है। 
 इनका कहना 
भारतीय खाद्य निगम ने चावलों के सैंपल लिए थे सैंपलों की जांच के बाद आगर ,सुसनेर ,नलखेड़ा के गोदामों की कुछ स्टाक के चावल वितरण पर रोक लगा दी थी । एक स्टाक में औसतन 1 से डेढ़ हजार क्विंटल अनाज होता है । रोक के आदेश के बाद चावल का वितरण रोक दिया है । शासन स्तर से जैसे आदेश आएंगे उस हिसाब से मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।
 के एल परमार जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम 
 हमने तो समय रहते नांन को दे दी थी जानकारी जब चावल वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के गोदामों में आ रहा था तभी जिम्मेदारों को  बात बता दी गई थी । किंतु नागरिक आपूर्ति निगम ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया । इसलिए हम क्या कर सकते हैं। वेयरहाउसिंग कारपोरेशन की जिम्मेदारी तो गोदामों में रखे माल की सही तरीके से देखरेख और उसकी सुरक्षा करने तक ही सीमित है ।
आर के शर्मा जिला प्रबंधक वेयरहाउसिंग कारपोरेशन आगर

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