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उज्जैन। इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्त होने के दूसरे दिन से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ नहीं  होगी। ऐसा अधिकमास के कारण होगा, जिसकी शुरूआत 18 सितंबर से होगी।

अमूमन हर साल पितृ पक्ष याने श्राद्घ समाप्ति के अगले ही दिन से नवरात्रि उत्सव शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार यह पर्व पितृ पक्ष समाप्ति के एक माह बाद शुरू होगा। पं. मनीष शास्त्री की माने तो इस बार श्राद्घ पक्ष समाप्त होते ही अधिकमास लग जाएगा। ऐसे में नवरात्र व पितृ पक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा। आश्विन मास में मलमास लगने व एक महीने के अंतर पर नवरात्रारंभ का संयोग 165 साल पहले बना था। 17 अक्टूबर से नवरात्रि पर्व शुरू होगा। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी। जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे। इसके बाद ही विवाह, मुंडन आदि मंगल कार्य शुरू होंगे। मलमास को अधिक मास, पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. धर्म कर्म की दृष्टि से मलमास का विशेष महत्व है ।  मलमास में किसी भी शुभ और नए कार्य को नहीं किया जाता है. पंचांग के अनुसार मलमास प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार आता है. । मलमास को अधिक मास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है  । मलमास में शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. शुभ कार्यो को मलमास मे निषेध माना गया है.  पूजा पाठ, व्रत, उपासना, दान और साधना को सर्वोत्तम माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मलमास में भगवान का स्मरण करना चाहिए ।  अधिक मास में किए गए दान आदि का कई गुणा पुण्य प्राप्त होता है. इस मास को आत्म की शुद्धि से भी जोड़कर देखा जाता है ।

 कब तक है मलमास


मलमास 18 सितंबर से आरंभ हो रहा है और 16 अक्टूबर को समाप्त होगा. 17 अक्टूबर से शरदीय नवरात्रि का पर्व आरंभ हो जाएगा।.


मलमास का अर्थ


मलमास का संबंध ग्रहों की चाल से है. पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से है. सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है. इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है. यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता है. इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है. इसी को मलमास कहा जाता है।.

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