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सुसनेर से युनूस खान लाला चिरंतन न्युज के लिए

 सहकारी संस्थाओं के जरिए गरीबों को घटिया क्वालिटी के चावल के वितरण किए जाने का मामला मध्य प्रदेश के साथ-साथ अब सुसनेर ब्लाक में भी सामने आया है । क्षेत्र की सहकारी संस्थाओं से इस चावल का वितरण अभी हो रहा है । जबकि शासन ने अब सप्लाई पर रोक लगाई है । इसी के चलते भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में स्टाक में  रखे चावल के नमूने लेकर के जांच के लिए भेजे हैं । हालांकि रोक के बावजूद सहकारी संस्थाओं में जो स्टॉक बचा है उसकी सप्लाई गरीबों में वितरण करना बदस्तूर जारी है । जो चावल मिल  द्वारा स्पलाई हुई उनकी सप्लाई बालाघाट और सिवनी जिले के कई चावल मिल जो की घटिया चावल सप्लाई के आरोप में सील हो चुकी है ।उन्होंने ही इस चावल की सप्लाई की है ।इस मामले में शासन द्वारा मामले की जांच भी करवाई जा रही है । सुसनेर क्षेत्र में घटिया चावल का वितरण भले ही शासन ने रोक दिया है किंतु अभी तक किसी भी सहकारी संस्था के पास चावल के वितरण को रोकने का आदेश नहीं पहुंचे हैं । अप्रैल 2020 से अभी तक मिला 32795   क्विटल चांवलसुसनेर क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन  हाउसिंग कारपोरेशन के द्वारा प्रदाय योजना के द्वारा वितरण करने वाली दुकान तक पहुंचाया जाता है। वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के गोदाम प्रभारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुसनेर क्षेत्र की राशन दुकानों और सहकारी संस्थाओं में गरीबों और जरूरतमंदों में वितरण करने के लिए अभी तक 1 अप्रैल 2020 से 31 अगस्त 2020 तक कुल 32795 कुंटल चांवल आया है । इसमें से सात हजार 651क्विटल चांवल गोदामों में रखा है। शेष चांवल सहकारी संस्थाओं और राशन दुकानों में भेज दिया गया है। क्षेत्र में 48 दुकानों के जरिए 5 किलो के मान से सदस्यों की संख्या के आधार पर दुकानदारों ने अधिकांश चावल खराब होने के कारण करीब 25000   कुंटल चावल इन दुकानों तक शासन ने पहुंचाया जरूर किंतु व जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा । दुकानों तक पहुंचे चावल का अगर 30% भी बाजार में चावल बेच दिया जाए  तो यह आंकड़ा 7500 कुंटल के करीब होता है । इस चावल को औसतन ₹20 प्रति किलो की दर बाजार में बेचा माना जाए तो इसकी कीमत डेढ़ करोड़ के लगभग होती है। इतनी बड़ी राशि की हेराफेरी में सरकारी संस्थाओं के जिम्मेदारों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं ।इनका कहना भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों द्वारा चावल के सैंपल लिए गए हैं। तथा उन्हीं के आदेश से अब तक जो सरकार शेष बचा है। उसकी सप्लाई पर रोक लगा दी गई है तथा जांच के नतीजों का इंतजार है । इसके बाद ही इस बात का निर्णय होगा कि जो स्टॉक बचा है उसका क्या किया जाए। जितेंद्र सिंह डावर सहायक गुणवत्ता नियंत्रक वेयर हाउस कारपोरेशन सुसनेर 
कई सहकारी संस्थाओं ने तो उनसे चावल के घटिया होने की शिकायत की है । उन्होंने सभी से यह कहा कि पंचनामा बनाकर के चावल वापस भेज सकते हैं। एमएम खान परिवहन कर्ता द्वार प्रदाय योजना  सुसनेर 
कुछ उपभोक्ताओं द्वारा चावल को व्यापारियों को भेजा जा सकता है। इसमें नई बात नहीं है कुछ और भोक्ता तो सीधे ही पर्ची व्यापारियों को दे देते हैं । इसको रोक पाना हमारे हाथ में नहीं है। जिस किसी भी दुकान में खराब चावल है वह उपभोक्ता को वितरित नहीं करें। टीका राम अहिरवार अधिकारी सूसनेर

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