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व्यक्ति को पूर्णता प्रदान कर एक जागरूक नागरिक बनाने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान – राज्यपाल

उज्जैन 05 सितम्बर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने गत दिवस बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के दीक्षांत समारोह को राजभवन, लखनऊ से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा से व्यक्ति में समाज बोध का विकास होता है एवं वह समाज के सभी अंगों के प्रति आदर, समन्वय एवं सहयोग की भावना को आत्मसात करता है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पूर्णता प्रदान कर एक जागरूक नागरिक बनाने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है। सही एवं सार्थक शिक्षा व्यक्ति के वैयक्तिक एवं सामाजिक उद्देश्यों में समन्वय स्थापित कर उसे अपने जीवन के लक्ष्यों का चयन करने एवं हासिल करने के लिए प्रेरणा प्रदान करती है।

राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की संकल्पना समाज की आवश्यकता तथा विद्यार्थियों की रचनात्मक  सोच,  तार्किकता एवं नवाचार  की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारत की परम्परा, विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों एवं तकनीकी ज्ञान तथा कौशल विकास में समन्वय स्थापित करने का सफल प्रयास किया गया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा की प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन किये गये हैं। स्नातक स्तर पर महत्वपूर्ण सुधार करते हुए तीन अथवा चार वर्ष के स्नातक कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कई स्तरों  पर पाठ्यक्रम  छोड़ने का प्रावधान किया गया है। इससे  विद्यार्थी  अपनी सुविधा  एवं रुचि के  अनुसार उपाधि  प्राप्त  कर  जीवन  में  विकल्प चुन सकेंगे।

श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आज का यह दौर हम सभी के लिए कठिन है। हमारे युवाओं की कठिनाई तो और भी गंभीर दिखाई देती है। आवश्यक है कि अपने सपनों को पूरा करने के प्रयासों में सभी युवा निरंतर जुटे रहेंे। हमारे देश के इतिहास में, ऐसे प्रेरक उदाहरण मौजूद हैं जहां बड़े-बड़े संकटों एवं चुनौतियों के बाद सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्र पुनर्निर्माण का कार्य नई ऊर्जा के साथ किया गया।

राज्यपाल ने युवा छात्रों की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमारा विशाल देश, युवा शक्ति से भरा हुआ देश है। आत्मनिर्भरता को दिल और दिमाग में बैठा लें। आत्मनिर्भरता के खुद प्रयास करें और दूसरों के प्रयासों में मदद करें। यही विकास को नई गति, नई ऊर्जा देगा। राज्यपाल ने छात्रों का आह्वान करते हुए कहा कि वे प्रदेश एवं देश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित करें। उनसे राष्ट्र को आशाएं हैं, जिसे वे अनुशासन, सदाचार, दृढ़ता, सामाजिक लगाव एवं संस्था तथा देश के प्रति प्रतिबद्धता जैसे गुणों के विकास के माध्यम से पूरा कर सकते हैं।

राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में कला, सामाजिक विज्ञान, जीव विज्ञान, विधि, वाणिज्य, शिक्षा, गृह विज्ञान एवं प्रबंध संकाय के 62 पंजीकृत विद्यार्थियों को पी.एच.डी. की ई-उपाधि प्रदान की। इस अवसर पर उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि हमारे युवा शोध के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहे हैं। दीक्षांत में 27 विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर स्वर्ण पदक प्रदान किये गये, जिसमें से 21 छात्राएं एवं 6 छात्र हैं। राज्यपाल ने कहा कि हमारी बेटियों की सहभागिता एवं परिश्रम का परिणाम है कि उन्होंने अधिक मेडल प्राप्त किए। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हमें इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. धीरेन्द्र पाल सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.जे. राव तथा कुल सचिव श्री अजित श्रीवास्तव भी आनलाइन जुड़े हुए थे।

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