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एकदम से ज्यादा बारिश व नदी नाले उफान पर आने के कारण फसल में लगने वाली बीमारियों ने इसे पूरी तरीके से नष्ट कर दिया

उज्जैन/घोसला : मध्य प्रदेश में उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील के ग्राम कामलिया खेड़ी में सोयाबीन की फसल की हालत काफी खराब हो चुकी है। एक तो पहले बारिश कम होने की वजह से यहां सोयाबीन पहले से ही कमजोर थी फिर एकदम से ज्यादा बारिश व नदी नाले उफान पर आने के कारण। तथा इसी बीच अचानक से इसके फसल में लगने वाली बीमारियों ने इसे पूरी तरीके से नष्ट कर दिया है। जिससे किसानों को कोरोना के बाद यह दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। वहीं, अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं।

फसल पूरी तरह पीली पड़ चुकी है व फफूंद भी पड़ गई,

महिदपुर तहसील के गांव कामलिया खेड़ी,खेड़ाकासोन बागनी,बीलखेड़ा, घोड़ाबाघ, टिल्याखेड़ी,आलाखेड़ा, कलापिपलिया,अजरतपुर में कोई भी खेत ऐसा नहीं बचा जिसमें सोयाबीन की फसल सही तरीके से दिखाई दे।व ग्राम कामलियाखेड़ी के सरपंच डूंगर सिंह आंजना व उपसरपंच जितेन पुरी कृषि मित्र भारत सिंह ने बताया कि फसल पूरी तरह पीली पड़ चुकी है व फफूंद भी पड़ गई, जिससे उसमें फली भी नहीं आई है और जिसमें फली है तो उसमें दाने नहीं हैं। जिसके चलते किसानों को अब डर सता रहा है कि जो कर्ज लेकर उन्होंने इस फसल को बोया था जिसे काटने के लिए भी नहीं कर्ज न लेना पड़े। किसानों का कहना है कि खराब फसल को कटवाना भी महंगा पड़ जाएगा। क्योंकि सोयाबीन में फसल के नाम पर दाने भी नहीं हैं। इसलिए इसे कटवाने से अच्छा है कि सीधा बिखेर दिया जाए।

इस बार फसल से 1 रुपया भी हाथ में नहीं आने वाला

सोयाबीन की खेती करने वाले किसान मांगीलाल,कालू सिंह,सुरेश सिंह,ईश्वर प्रजापत,ईश्वर सिंह,भादर सिंह,नरेंद्र सिंह,अंतर सिंह,अर्जुन आंजना,पीरु प्रजापति,शंकरलाल,अंतर सिंह,गंगाराम,गोपाल,गोविंद,नारायण सिंह,जगदीश मालवीय तथा समस्त ग्रामवासी का कहना है कि एक बीघा सोयाबीन की फसल में किसान की 7 से 8 हजार रुपए की लागत लग जाती है। और इस बार तो कुछ किसानों ने सोयाबीन की फसल 2 बार बोई है जिससे उसकी लागत काफी बढ़ गयी है। एक बीघा जमीन में जो लागत लगी है, उसका कोई लाभ नहीं होने वाला क्योंकि इस बार फसल से 1 रुपया भी हाथ में नहीं आने वाला है।

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