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दूसरों के अंदर डर पैदा करने वाला आज खुद जीवन को लेकर भयभीत

गया। आदर्श मध्य विद्यालय चिरैली, खिजरसराय की विज्ञान शिक्षिका सह जंतु विज्ञान की विशेषज्ञ डॉ ज्योति प्रिया ने विश्व बाघ दिवस के अवसर पर कहा की टाइगर अर्थात बाघ को देखकर लोग भयभीत हो जाते हैं इसकी बड़ी-बड़ी आंखें और दहाड़ सुनकर लोगों के अंदर का डर बाहर चला जाता है और लोग जान बचाने के लिए छिप जाते हैं। लेकिन दूसरों के अंदर डर पैदा करने वाला यही टाइगर आज अपने जीवन को लेकर भयभीत है।इसके अस्तित्व पर लगातार खतरा मंडरा रहा है और ये प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है।

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अगर समय रहते उनके संरक्षण के लिए उचित कदम नहीं उठाएं गए तो डायनासोर की तरह यह भी सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह जाएंगे।ऐसे मे इनका संरक्षण जरूरी है। टाइगर को संरक्षित करने और उनकी इस प्रजाति की उपस्थिति धरती पर सदियों तक बनाए रखने के लिए 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस के रूप में मनाया जाता है।

टाइगर भारत के अलावा विश्व के अनेक भागों में पाया जाता है, लेकिन इसके ऊपर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। अगर इनकी संख्या घटने की यही स्थिति रही तो आने वाले समय में टाइगर का नामोनिशान इस धरती से मिट जाएगा।बाघों की संख्या घटने के लिए मानवीय हस्तक्षेप ज्यादा जिम्मेदार है।बाघो के रहने योग्य जंगलो की कमी,पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण की वजह होने वाला जलवायु परिवर्तन और बाघों की तस्करी से इनके अस्तित्व खतरे में है।धरती पर पर्यावरणीय संतुलन के लिए बाघों का होना जरूरी है।

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