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तनोडिया।इस वर्ष शिक्षा का विषय  बड़ा और गम्भीर हो गया है जिसका कोई उपाय निकलना अतिआवश्यक है ।एकतरफ प्राइवेट स्कूलों से जुड़े दीदीयों ,आर्चाय सहित संचालको की समस्याएं है तो दूसरी ओर अभिभावकों की समस्याएं है और इनके बीच बच्चों का भविष्य झूल रहा है।

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जहां तक प्राइवेट स्कूलों की बात है इनके कर्मचारियों और अध्यापकों के सामने विषम आर्थिक परिस्थितियां उत्पन्न हो गई है क्योंकि लम्बे समय से स्कूल बंद है और स्कूल संचालकों की समस्या ये है कि स्कूल बंद होने से कमाई बन्द है, बिल्डिंग- वाहन -फर्नीचर आदि पर लिए गए ऋण की किश्ते भर पाना ही मुश्किल हो रहा है तो कर्मचारियों और अध्यापकों को वेतन कहाँ से दें?अभिभावकों की बात करें तो वर्तमान स्थितियों के चलते न सिर्फ व्यवसाय प्रभावित हुए है बल्कि प्राइवेट नोकरी वालों में से कइयों  की आर्थिक स्थिति विकट है,ऐसे में शिक्षा पर खर्च करना कैसे सम्भव है?दोनों पक्षों के बीच बच्चों का भविष्य अधर में है ऑनलाइन क्लासेस सभी वर्ग के बच्चों के लिए सम्भव नही है,यहाँ वर्ग से आशय केवल आर्थिक न होकर उम्र, कक्षा,मानसिक क्षमता, अभिभावकों द्वारा बच्चों को दिए जाने वाले समय और अभिभावकों की स्वयं की मानसिक क्षमता सभी से है ।

ऐसे में व्यवस्थित शिक्षा हेतु अन्य कोई उपाय निकाल पाना दूर की कौड़ी है। सभी वर्गों के समन्वय से ओर सुझावों से कोई हल निकाला जा सकता है जिसमें सबका हित समाहित हो लेकिन इसके लिए व्यवस्थित संगठित प्रयास वर्तमान में दिखाई नही दे रहा है।

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