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चिरंतन न्यूज़ के लिए मोड़ी (सुसनेर) से जगदीश परमार की रिपोर्ट

भादो मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर भक्तिभाव से गांव मोड़ी  के प्रसिद्ध गोर्वधननाथ मंदिर, श्रीकृष्ण मंदिर एवं श्रीराम मंदिर से एक साथ विमान डोल निकाले गए। विमान के साथ चल रहे श्रद्धालु जयघोष करते हुए कह रहे थे। जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ा पालकी, नगर भ्रमण के बाद जल बिहार के उपरांत भगवान के डोल वापस मंदिरों में पहुंचे। विमान के साथ मंदिर के पुजारियों, श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा।

जगह जगह हुई पूजा अर्चना


नगर भ्रमण पर निकले माता यशोदा एवं उनके पुत्र कन्हैया की जगह जगह पूजा अर्चना हुई। मोड़ी नगर  में श्रद्धालु  नागरिकों ने विमान के समक्ष आकर पूजा अर्चना की। इसी तरह गांव में भी अपनी दुकान के सामने से निकल रहे विमान में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण एवं माता यशोदा के दर्शन कर आरती उतारी।

द्वापर युग से जारी परंपरा


प्राचीन मान्यताओं के अनुसार माता यशोदा एकादशी के अवसर पर घाट पूजने के लिए राजमहल से विमान से जा रही थी, तभी नन्हा कान्हा रुदन करने लगे। मैया यशोदा ने समझा कन्हैया चलने की जिद कर रहा हैं, तो उन्हें विमान पर सवार कर नगर भ्रमण करते हुए घाट पूजने गई तभी से विमान जिन्हें डोल या डोला भी कहा जाता है। निकलने लगे द्वापर युग से लेकर यह परंपरा निरंतर जारी है। डोल निकलने के कारण ही तिथि का नाम डोल ग्यारस भी कहा जाता है।

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