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लेखिका-दीप्ति डांगे,मुंबई


पिछले साल पूरी दुनिया मे एक महामारी फैली-

“कोरोना” जिससे भारत भी अछूता नही रह पाया। सबसे पहला केस जनवरी 2020 में आया जो बढ़ते हुए करोड़ो मे चला गया।लाखों को जान से हाथ धोना पड़ा।70 दिन तक लोग घरों मे बंद रहे लॉकडाउन की वजह से, अर्थव्यवस्था पटरी से उतर कर नकारात्मक हो गयी। लाखो लोग बेरोजगार हो गए। हमने अनुशासन का पालन करते हुए जैसे मास्क पहनना और दो गज दूरी रखना बहुत हद तक कोरोना को मात दी।और जनवरी 2021 आते आते कोरोना के केस काफी कम हो गए।देश ने आत्मनिर्भरता की तरफ अपने कदम बढ़ाए और जो वस्तुएं हम आयात करते थे वो हम खुद बनाने लगे,कई बाहर की कंपनियां अपना बिज़नेस भारत मे लेकर आयी, और धीरे धीरे जिंदगी और देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर फिर से चले लगी और सकारात्मक हो गयी। सबसे राहत की बात कोरोना वैक्सीन का आना।लेकिन खतरा टला नही था भले की वायरस कमजोर हुआ पर खत्म नही हुआ,केसेस भले ही कम हुए लेकिन कोरोना अभी भी देश में था।


बीएल कपूर अस्पताल में सेंटर फॉर चेस्ट एंड रेस्पायरेट्री डिजीज़ विभाग के प्रमुख 


डॉक्टर संदीप ने बताया, “जब से कोरोना वायरस के मामले कम हुए तब से लोग लापरवाह हो गए ।उन्होंने मास्क लगाना, बार-बार हाथ धोना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना कम कर दिया। साथ ही कई लोगों को लगने लगा है कि वैक्सीन की एक डोज़ लेने बाद ही वो इम्यून हो गए हैं।अब उन्हें कोरोना नहीं होगा लेकिन, ऐसा नहीं है।”

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और उसका दुष्परिणाम ये हुआ कोरोना की दूसरी पारी शुरू हो गयी और कोरोना ने नई ताकत के साथ वापसी की है।अब सिर्फ ये चीनी वायरस नही रह गया ये म्युटेंट (जब किसी जीन के डीऐनए में कोई स्थाई परिवर्तन होता है तो उसे उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) कहा जाता है। यह कोशिकाओं के विभाजन के समय किसी दोष के कारण पैदा हो सकता है या फिर पराबैंगनी विकिरण की वजह से या रासायनिक तत्व या वायरस से भी हो सकता है)हो रहा है और कोरोना के कई वेरिएंट जैसे यूके और ब्राजील और दक्षिण अफ्रीकी के साथ-साथ भारत में पाया गया नया ‘डबल म्यूटेंट’ वैरिएंट भी शामिल है। सार्वजनिक नीति और स्वास्थ्य प्रणाली विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रकांत लहारिया कहते हैं, “बाकी देशों से जो अनुभव आये हैं वो बताते हैं कि कोविड-19 अपनी दूसरी लहर में तेज़ी से फैलता है।हालांकि,उसकी बीमारी करने की क्षमता तुलनात्मक रूप से कम होती है।लगभग सारे देशों में पहली लहर के मुक़ाबले दूसरी लहर ज़्यादा ख़तरनाक रही है। ये एक प्राकृतिक प्रक्रिया है इसका कारण जब लोग असावधान हो जाते हैं तो वायरस के लिए स्थितियां और अनुकूल हो जाती हैं।वर्तमान में ऐसा ही हो रहा है।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कि भारत में कोरोना वायरस के एक नए ‘डबल म्यूटेंट’ वेरिएंट का पता चला है।जो तेजी से फैलता है यानि ये ज्यादा संक्रामक है। साथ ही यह शरीर के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र से बचने में भी सक्षम है। यह नया ‘डबल म्यूटेंट’ वैरिएंट शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र से बचकर बॉडी में संक्रामकता के स्तर को बढ़ाता है।सरल शब्दों,डबल म्यूटेंट’ वैरिएंट वायरस का वो रूप है, जिसके जीनोम में दो बार बदलाव हो चुका है। वैसे वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदलाव होना आम बात है।दरअसल वायरस खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं ताकि उन्हें मारा न जा सके।ये सर्वाइवल की प्रक्रिया ही है, जिसमें जिंदा रहने की कोशिश में वायरस रूप बदल-बदलकर खुद को ज्यादा मजबूत बनाते हैं. ये ठीक वैसा ही है, जैसे हम इंसान भी खुद को बेहतर बनाने के लिए कई नई चीजें सीखते और आजमाते हैं. बस वायरस भी इसी फॉर्मूला पर काम करता है।


15 फरवरी 2021 के बाद से कोरोना की दूसरी पारी की शुरुआत मानी जा रही है और हर दिन कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे है मार्च महीने में ही हर दिन में 50 हजार से ज्यादा नए मामले देखने को मिल रहे हैं।जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 31 मार्च को खत्म होने वाले सप्ताह में हर दिन औसतन 62,000 नए मामले सामने आए. यह पाँच महीनों में दर्ज किए गए नए मामलों का सबसे अधिक साप्ताहिक औसत है।जो दुनिया भर में रिपोर्ट किए गए नए मामलों में भारत की हिस्सेदारी 11% है।


बीते 15 दिनों से भारत में कोरोना वायरस का मामला हर दिन औसतन लगभग 6% बढ़ रहा है।एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 10-15 दिनों में कोरोना संक्रमण अपने सेकंड पीक में पहुंच जाएगा मतलब भारत 93,000 नए मामलों के साथ  कोरोना की पहली लहर के आंकड़ों को भी पार कर जाएगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना की दूसरी लहर कुल 100 दिनों तक चल सकती है और इस दौरान संक्रमण के कुल मामले करीब 25 लाख पहुंच सकते हैं।


अब सवाल ये है कि बदले हुए वायरस के लक्षण क्या हैं? क्या वैक्सीन कारगर होगी और क्या मास्क पहनने की जरूरत नही होगी? संक्रमण की सेकेंड वेव और डबल म्यूटेंट की दोहरी चुनौती से बच पायेंगे?क्या फिर से सरकार लॉकडाउन करेगी?
टीके से शरीर में दो तरह की इम्युनिटी पैदा होती है। एक इफेक्टिव इम्युनिटी और दूसरी स्टरलाइजिंग इम्युनिटी।स्टरलाइजिंग इम्युनिटी वायरस से पूरी तरह सुरक्षा मुहैया कराती है। इसका मतलब है कि फिर वायरस का कोई कण शरीर की कोशिकाओं में नहीं घुस सकता।शरीर में वारयस अपने जैसे वायरस भी नहीं बना पाता और आगे उसका प्रसार भी रुक जाता है.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में क्लीनिकल रिसर्च फेलो सारा कैंडी कहती हैं, “इसे हासिल करना मुश्किल है।शरीर में वायरस के प्रवेश को रोक पाना लगभग असंभव है।”


मतलब कोई भी टीका सौ फीसद रिस्क कवर नहीं करता है। लेकिन इतना ज़रूर है कि टीके से इस तरह के वायरस में धीरे-धीरे इंफेक्शन का रिस्क कम होता जाता है।
इसलिए ये कहना कि वैक्सीन लगे लोगों में ही सिर्फ़ कोरोना संक्रमण का रिस्क कम है, ये सही नही है।अगर हम मास्क नहीं पहनेंगे और डिस्टेंस मेंटेन नही करेंगे तो ये कोरोना संक्रमण बड़ जाएगा क्योंकि बाहर या भीड़ में ये पहचानना मुश्किल हो जाता है कि किसको टीका लगा है, और किसको वायरस लगा है इसलिए किसी भी जगह जहाँ लोगों का जमावड़ा है वहाँ मास्क पहनना और 2 गज की दूरी जरूरी हो जाती है।


अगर ऐसे ही संक्रमण बढ़ता रहा तो  सरकार को न चाहते हुए भी लॉकडाउन करना पड़ेगा। इसलिए अब ये हमारी जिम्मेवारी है कि हम जहां तक हो सके बाहर जाने से बच सके, मास्क पहने और 2 गज की दूरी रखे।
स्वस्थ रहे, सुरक्षित रहे और कोरोना को न कहे।

प्रस्तुति रिपोटर चंद्रकांत सी पूजारी

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