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महीनों से बंद पड़ा हेडपंप
अपना अस्तित्व खोती प्राचीन धरोहर (कुईया)

सोयत कला 21 मार्च 2021


(राजेश बैरागी)


शासन प्रशासन द्वारा एक तरफ लाखों रुपए खर्च करके अनेक प्रकार के विज्ञापनों द्वारा स्वच्छता के लिए जनता को जागरूक किया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ ही जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं स्वच्छता के नाम पर बस केवल कुछ वार्डों में साफ सफाई करके स्वच्छता अभियान की इति श्री कर ली जाती है वार्ड क्रमांक 13 ,14 व 9 में अनेक जगह कई दिनों से नालियों की साफ-सफाई भी ठीक प्रकार से नहीं हुई है साथ ही इन वार्डों से निकलने वाले सामूहिक रास्ते पर पॉलिथीन के साथ कचरे का ढेर पड़ा हुआ है उसी कचरे के ढेर में पढ़ी हुई पॉलीथिन निर्दोष जानवरों के काल का ग्रास बन रही हैै।

महीनों से बंद पड़ा हेडपंप
मुख्य मार्ग पर लगा गंदगी का अंबार

वार्ड क्रमांक 13 ,14 ,15 एवं 9 से निकलने वाले सामूहिक रास्ते पर कंठाल नदी के समीप एक हेडपंप कई महीनों से बंद पड़ा हुआ है !लेकिन फिर भी जिम्मेदारों का इस और कोई ध्यान नहीं है साथ ही हेडपंप के पास हजारों रुपए की लागत से बनी पानी की एक होद है जो पानी के अभाव में हमेशा खाली पड़ी रहती है !वैसे भी अब गर्मी की शुरुआत हो चुकी है ,अगर ऐसी स्थिति में हेडपंप चालू हो जाता है तो आम जनता के साथ-साथ पशु पक्षियों को भी पानी उपलब्ध हो जाएगा !जिससे वे अपने सूखे कंठ को गीला कर सके!

अपना अस्तित्व खोती प्राचीन धरोहर की (कुईया)

कंठाल नदी के समीप बनी हुई अति प्राचीन कुईया इन दिनों अपनी दुर्दशाा पर आंसू बहा रही है वह भी सोच रही है की मे भी किन इंसानों के काम आ रही थी! जिन्हें मुझसे कुछ लेना देना ही नहीं है इंसान केवल अपने स्वार्थ के लिए ही मेरे पानी का उपयोग कर रहा है एक समय था जब लोगों द्वारा मेरे पानी का उपयोग अपने दैनिक कार्यों के लिए किया जाता था! लेकिन वर्तमान समय में मेरे पानी का उपयोग दैनिक कार्यों में करना तो दूर मेरे पानी को छूना भी पसंद नहीं करते वर्ष 2020 में अत्यधिक वर्षा होने के कारण कुईया के चारों और बनी मुंडेर पूरी तरह से उखड़ गई थी !लेकिन बारिश निकले लगभग 6 माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फिर भी जिम्मेदारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया हालांकि कई वर्षों पहले शासन प्रशासन के सहयोग से ही इसी कुईया की साफ-सफाई व गहराई का कार्य किया गया था!

महीनों से बंद पड़ा हैंडपंप

वैसे भी होली का त्योहार नजदीक आने वाला है होलिका दहन के दूसरे दिन महिलाएं होली की पूजा अर्चना के लिए समीप लगे हेडपंप या कुईया से पानी भर लेती थी! लेकिन शायद इस वर्ष बंद पड़े हेडपंप और बिना मुंडेर की कुईया से पानी नहीं भर सकेगी! ऐसी स्थिति में महिलाओं को अपने अपने घरों से ही पानी लाना पड़ेगा अब देखना यह है कि क्या जिम्मेदार लोग इस समस्या की तरफ ध्यान देंगे या फिर से ही सारी समस्याएं केवल कागजी कार्यवाही तक ही सीमित रह जाएगी!

प्राचीन धरोहर (कुईया) की दुर्दशा

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